पड़ताल : नरेंद्र मोदी को ड्रैकुला बताने वाले पोस्टर AMU के नहीं तो कहां के हैं?
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पड़ताल : नरेंद्र मोदी को ड्रैकुला बताने वाले पोस्टर AMU के नहीं तो कहां के हैं?

By TheLallantop calender  21-Aug-2019

पड़ताल : नरेंद्र मोदी को ड्रैकुला बताने वाले पोस्टर AMU के नहीं तो कहां के हैं?

क्या है दावा?
फेसबुक पर वायरल पोस्ट्स के मुताबिक़, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में ऐसे पोस्टर लगे थे. जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कश्मीर का ड्रैकुला कहा गया है. फोटोशॉप की हुई फोटो लगी है, जिसमें नरेंद्र मोदी के हाथों को खून से रंग दिया गया है. और उनके मुंह पर मांस और खून लगा नज़र आ रहा है. इस सबके पीछे अनुच्छेद 370 में बदलाव को वजह बताया गया है.
साथ ही एक टेक्स्ट लिखा मिलता है. मूल पोस्ट्स में जैसा लिखा है. वैसा ही प्रस्तुत है.
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने धारा 370 हटाने के विरोध में इस तरह के पोस्टर लगाए हैं।
क्या फायदा ऐसे लोगों को पढ़ाने का जिनकी सोच ऐसी जघन्य हो?
उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय
मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से निवेदन है कि जिन्होंने ये पोस्टर लगाए हैं उनका ठीक से इलाज करें । 
इन पोस्ट्स के स्क्रीनशॉट भी आपकी सुविधा के लिए यहां लगा दिए गए हैं.
सच्चाई क्या है?
सच ये है कि ये तस्वीरें अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की नहीं हैं. वहां के छात्रों ने ऐसे पोस्टर नहीं लगाए. सोशल मीडिया पर झूठ कहा जा रहा है. ये पोस्टर लंदन में लगाए गए थे.
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दावे की पड़ताल में क्या पता लगा?
1. सबसे पहले हमें नज़र आया अलीगढ़ पुलिस का ये ट्वीट. ट्वीट में साफ़ लिखा है AMU के छात्रों से इस पोस्टर का कोई लेना-देना नहीं है.
2. पोस्टर कहां का है ये जानने के लिए हमने मिलते-जुलते कीवर्ड्स से गूगल पर सर्च किया. नज़र आई आल्ट न्यूज़ की एक ख़बर. जिसमें बताया गया था कि ये पोस्टर अलीगढ़ का नहीं है. और न ही ये भारत का है. ये पोस्टर लंदन का है. लंदन में स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर 15 अगस्त को ब्रिटेन की कश्मीर काउंसिल ने प्रदर्शन किया था.  वहीं पर ऐसे पोस्टर्स का इस्तेमाल किया गया था.
3. तलाशने पर हमें उस प्रोटेस्ट के वीडियोज और तस्वीरें नजर आए. ये वीडियोज 15 अगस्त के दिन अपलोड किए गए थे. वीडियो में आपको वही पोस्टर नज़र आ रहा होगा, जिसे AMU का बताया गया है.
4. हमें तलाशने पर इसी पोस्टर की दूसरे एंगल से ली गई तस्वीर भी नज़र आई. जिसमें आप लिखी हुई बातें और आसपास की अन्य डीटेल्स देख सकते हैं. तस्वीर में साफ़ दिखता है कि ये जगह AMU नहीं है. अगर आप आसपास के लोगों के कपड़ों पर ध्यान दें तो उन्होंने जैकेट्स और स्वेटर जैसी चीजें पहनी हैं. अलीगढ़ का मौसम स्वेटर पहनने वाला नहीं है.
5. ये प्रदर्शन 15 अगस्त के दिन किया गया था. कई पाकिस्तानी संगठन भी इस प्रदर्शन में शामिल थे. ट्विटर पर #15AugustBlackDay नाम का ट्रेंड चला रहे थे. आप उस ट्रेंड पर क्लिक करें तो भी उस रोज़ की कई तस्वीरें नजर आ जाएंगी. इस प्रदर्शन की कई ख़बरें मीडिया में आई थीं. विरोध प्रदर्शन के नाम पर गुंडागर्दी की जा रही थी. जिस कारण स्कॉटलैंड यार्ड ने चार लोगों को गिरफ्तार भी किया था.
लंदन पुलिस के हवाले से पता लगा था कि भारत विरोधी प्रदर्शन करने वालों में खालिस्तान समर्थक और कश्मीरी अलगाववादी समूह भी शामिल थे. इन लोगों के विरोध में भारतीय समर्थकों ने तिरंगा लहराया और भारत माता की जय के नारे लगाए. जिसके कारण तनाव हुआ. हिंसा हुई. भारत समर्थक समूह पर बोतलें और पत्थर फेंके गए. ये मामला बड़ा हुआ. 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूके के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को फोन किया और इस हिंसा के बारे में बात भी की.
क्या रहा पड़ताल का नतीज़ा?
हमारी पड़ताल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में प्रधानमंत्री को ड्रैकुला कहे जाने की बात झूठी निकली. ये पोस्टर 15 अगस्त को लंदन में हुए भारत विरोधी प्रदर्शन का है. अलीगढ़ का नहीं. 

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