अनुज सिन्हा की पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में बोले हरिवंश, मोहनदास करमचंद गांधी को रांची ने गांधी बनाया
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अनुज सिन्हा की पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में बोले हरिवंश, मोहनदास करमचंद गांधी को रांची ने गांधी बनाया

By PrabhatKhabar calender  04-Aug-2019

अनुज सिन्हा की पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में बोले हरिवंश, मोहनदास करमचंद गांधी को रांची ने गांधी बनाया

रांची के मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में  प्रभात खबर के कार्यकारी संपादक अनुज कुमार सिन्हा की चार किताबों का लोकार्पण किया गया. इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि झारखंड में गांधी जहां-जहां गये थे, वहां एक शिलापट्ट के जरिए उसी स्थान पर जानकारी दी जाए कि गांधी कब आये थे और उन्होंने क्या कहा था. इस शिलापट्ट से युवाओं को इतिहास की जानकारी मिलेगी. मुख्यमंत्री ने इशारे में हामी भरकर हरिवंश के इस आग्रह को स्वीकार किया. गांधी को गांधी रांची ने कैसे बनाया इस पर भी विस्तार से चर्चा हुई. 
इस मौके पर उन्होंने शोध करने के लिए युवाओं को प्रेरित किया. हरिवंश ने कहा, अगर युवा टाना भगत, गांधी पर शोध करना चाहें तो यहां  पर्याप्त सामग्री है. इन किताबों से भी मदद मिलेगी इन किताबों के नाम हैं महात्मा गांधी की झारखंड यात्रा, असली झारखंड, झारखंड के आदिवासी पहचान का संकट और ब्यूरोक्रेट्स और झारखंड. लोकार्पण समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, मुख्यमंत्री रघुवर दास, पद्मश्री अशोक भगत, प्रभात खबर के प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी, प्रभात प्रकाशन के एमडी डॉ पियूष कुमार शामिल थे.

राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने क्या कहा 
चार पुस्तकों के लोकार्पण समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा, 150वीं जयंती के मौके पर देश और विदेश में चर्चा चल रही है. महात्मा गांधी को महात्मा गांधी बनाने वाला रांची है. अहिंसा के जरिए देश दुनिया को बदला जा सकता है इसकी चर्चा भी रांची में हुई. मजदूरों के बारे ने गांधी जी ने भाषण दिया. गांधी जहां-जहां आये वहां शिलापट्ट लगा देना चाहिए. बच्चे और लोग आएं तो प्रेरणा ग्रहण करके जाएं. गांधी रांची आये तो सारी बातचीत रांची में हुई. मजदूरों पर झरिया में भाषण दिया. गांधी को गांधी रांची ने बनाया.  

 
गांधी जी ने मिट्टी से जुड़े लोगों को इतना ताकतवर बना दिया कि दुनिया के सभी देश आज झुक गये. गांधी से पहले का इतिहास हिंसा का रहा है. गांधी अकेले हुए जिन्होंने नये आंदोलन का बीज डाला. पश्चिम मानता था कि तिकड़म, झूठ और हिंसा से ही सत्ता तक पहुंचा जा सकता है. लेकिन गांधी ने साबित किया कि ऐसा नहीं है. गांधी जी ने जो चीजें कहीं वह कैसे प्राशंगिक हैं. हरिवंश ने देवघर सहित झारखंड के कई यात्राओं का जिक्र किया.   
 
हरिवंश ने ऐसे कई लेखों का जिक्र किया जिसमें नाम नहीं है, उनका संकलन भी जरूरी है. कई ऐसे लेख हैं जो बगैर नाम के लिखे जाते थे लोगों को लगता था कि मैं लिखता था. अज्ञात, अनाम से लोग लिखते थे. इसे भी लाना चाहिए संकलन करना चाहिए. गर्वनेंस रिपोर्ट पर प्रभात खबर ने काम किया. झारखंड डेवलपमेंट रिपोर्ट हम निकालते रहे. टॉप अर्थशास्त्री इसमें शामिल होते थे. सोशल ऑडिट 100 पेज का निकलता था. अनुज इस तरह का काम भी आगे करते रहेंगे. इन चारों किताबों का जिक्र करते हुए हरिवंश ने कई यादों का जिक्र किया कि कैसे लोग खुद लेख लेकर लिखने आते थे. कई लोग ऐसे थे जिन्हें खुद आमंत्रण देकर लिखने के लिए बुलाते थे.  
मुख्यमंत्री रघुवर दास 
मुख्मयंत्री रघुवर दास ने अनुज कुमार सिन्हा को बधाई देते हुए कहा, ये पुस्तकें आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देगी. अनुज किसी भी विषय को अच्छी समझ रखते हैं. राज्य में आदिवासी संकट में नही हैं. हां उनकी संस्कृति पर संकट है. धर्मांतरण एक बड़ी समस्या झारखंड में है. कई लोगों ने इस संस्कृति को खत्म करने की साजिश की लेकिन आज भी आदिवासी अपनी संस्कृति से जुड़े हैं. 
 
अपनी झारखंड यात्रा के दौरान खूंटी में महात्मा गांधी ने मुंडा समुदाय के लोगों से बात की थी और चिंता व्यक्ति की थी. अनुज जी ने इस प्रसंग का जिक्र भी किताब में किया है. संस्कृति की जड़े इतनी मजबूत हैं कि कोई इसे हिला नही सकता है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपनों का भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाने की कोशिश कर रहे हैं. जिसके तहत आज सारा देश स्वच्छता अभियान से जुड़ गया है. प्रधानमंत्री ने 2014 में आह्वान किया था कि हम गांधी के चरणों में स्वच्छ भारत दे सकते हैं क्या? पूरा देश इस अभियान से जुड़ गया. मुख्यमंत्री ने आड्रे हाउस में गांधी पर सामग्री इकट्ठा करने और प्रदर्शनी लगाने की भी बात कही.  
 
पद्मश्री अशोक भगत 
 
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विकास भारती के पद्मश्री अशोक भगत ने कहा,  अनुज जी ने झारखंड की धड़कनों को शब्दों में उतार दिया है. अनुज जी पत्रकारिता से जुड़े हैं इसलिए हर कदम पर जनता के साथ रहते हैं. पहले दो दशकों में कई चीजें लिखी है. अनुज जी ने उन तमाम लेखकों को आकार दिया है. 
यह आज की पीढ़ी के लिए खास है. गांधी झारखंड के लिए प्रसांगिक हैं. झारखंड का गांधी जी के आंदोलन से पुराना संबंध है. गांधी जी की 150वीं जयंति को लेकर योजना बन रही थी. इसमें मुख्यमंत्री रघुवर दास, हरिवंश जी मौजूद थे. गांधी के पहले टाना भगत आंदोलन चला है. जिसे मुख्यमंत्री ने महत्व दिया, उन्हें पहली बार अधिकार मिला है. इससे गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि दी गयी है.  
 

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