अब अगर कहा, तलाक तलाक तलाक तो मिलेगी ये सजा
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अब अगर कहा, तलाक तलाक तलाक तो मिलेगी ये सजा

By Tv9bharatvarsh calender  31-Jul-2019

अब अगर कहा, तलाक तलाक तलाक तो मिलेगी ये सजा

मोदी सरकार-2 ने ऐतिहासिक ट्रिपल तलाक बिल राज्यसभा में भी पास करवाने में सफलता हासिल की है. यानी अब महज इसमें औपचारिकताएं ही रह गई हैं. राष्ट्रपति के हस्ताक्षर बाद देश में कानून लागू हो जाएगा. लोकसभा में पहले ही बिल पास हो गया था, अब राज्यसभा में भी बिल पास हो चुका है. बिल के पक्ष में 96 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 84 वोट पड़े.
इससे पहले लोकसभा में भारी विरोध के बीच गुरुवार को ट्रिपल तलाक बिल पास हो गया है. एनडीए सरकार ने ट्रिपल तलाक बिल गुरुवार को लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए रखा था. इस बिल पर वोटिंग के दौरान समर्थन में 303 वोट पड़े, जबकि विरोध में 82 वोट डाले गए.
बीजेपी ने जारी किया था व्हिप
मालूम हो कि सत्तारूढ़ बीजेपी ने पहले ही एक व्हिप जारी किया था जिसमें अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए कहा था. जबकि जेडीयू, टीआरएस, YSR कांग्रेस और टीएमसी ने पहले ही सदन से वॉकआउट कर दिया था. बीजेडी ने बिल के समर्थन में ही वोटिंग की. ट्रिपल तलाक बिल मुस्लिम पुरुषों द्वारा तत्काल तलाक की प्रथा को अपराधी बनाता है और दोषियों के लिए जेल की सजा की मांग करता है. यह याद किया जा सकता है कि यह विधेयक नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अपने पहले सत्र में प्रस्तावित पहला मसौदा कानून था.
आखिरकार क्या होता है तीन तलाक ?
तीन तलाक का जिक्र न तो कुरान में कहीं आया है और न ही हदीस में. यानी तीन तलाक इस्लाम का मूल भाग नहीं है. तीन तलाक से पीड़ित कोई महिला उच्च अदालत पहुंची है तो अदालत ने कुरान और हदीस की रौशनी में ट्रिपल तलाक को गैर इस्लामिक कहा है. तीन बार तलाक को ‘तलाक-ए-बिद्दत’ कहा जाता है. बिद्दत यानी वह कार्य या प्रक्रिया जिसे इस्लाम का मूल अंग समझकर सदियों से अपनाया जा रहा है, हालांकि कुरआन और हदीस की रौशनी में यह कार्य या प्रक्रिया साबित नहीं होते.
जब कुरआन और हदीस से कोई बात साबित नहीं होती, फिर भी उसे इस्लाम समझकर अपनाना, मानना बिद्दत हैं. ट्रिपल तलाक को भी तलाक-ए-बिद्दत कहा गया है, क्योंकि तलाक लेने और देने के अन्य इस्लामिक तरीके भी मौजूद हैं, जो वास्तव में महिलाओं के उत्थान के लिए लाए गए थे.
इस्लाम से पहले अरब में औरतों की दशा बहुत खराब थी. वे गुलामों की तरह खरीदी बेची जाती थीं. तलाक भी कई तरह के हुआ करते थे, जिसमें महिलाओं के अधिकार न के बराबर थे. इस दयनीय स्थिति में पैगम्बर हजरत मोहम्मद सब खत्म कराकर तलाक-ए-अहसन लाए. तलाक-ए-अहसन तलाक का सबसे अच्‍छा तरीका माना गया है. यह तीन महीने के अंतराल में दिया जाता है. इसमें तीन बार तलाक बोला जाना जरूरी नहीं है. एक बार तलाक कह कर तीन महीने का इंतज़ार किया जाता है. तीन महीने के अंदर अगर-मियां बीवी एक साथ नहीं आते हैं तो तलाक हो जाएगा. इस तरीके में महिला की गरिमा बनी रहती है और वह न निभ पाने वाले शादी के बंधन से आज़ाद हो जाती है.
सजा का प्रावधान
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के मुताबिक यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी. इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज करने का अधिकार रहेगा. पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं कर सकता है.
समझौते का भी है प्रावधान
समझौते कि लिए क्या है शर्त केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए है. कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है. पत्नी की पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ.
जमानत के लिए प्रावधान
कानून के तहत मैजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है, लेकिन पत्नी का पक्ष सुनने के बाद. केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह पति-पत्नी के बीच का निजी मामला है. पत्नी ने गुहार लगाई है, इसलिए उसका पक्ष सुना जाना जरूरी होगा. प्रावधान तीन तलाक पर कानून में छोटे बच्चों की कस्टडी मां को दिए जाने का प्रावधान है. पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार मजिस्ट्रेट तय करेंगे, जिसे पति को देना होगा.
कानून मंत्री का तर्क 
सदन में बिल पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक पर रोक लगाने वाला ये विधेयक धर्म, सियासत, सम्प्रदाय का सवाल नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सम्मान और उन्हें मिलने वाले सम्मान का सवा है. इसी के साथ उन्होंने विधेयक के समर्थन में वोट करने की अपील भी की. वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस बिल को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की. उनका कहना है कि तीन तलाक को फौजदारी का मामला बनाना सही नहीं है.
ओवैसी का तर्क
हालांकि एआईएमआईएम के नेता और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि ये बिल महिलाओं के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि जब महिला के पति को 3 साल की सजा हो जाएगी और वह जेल में होगा तो उस महिला को 3 साल तक इंतजार करना होगा. सजा काट कर पुरुष जब वापस आएगा तो उससे महिला के साथ अच्छा व्यवहार की उम्मीद कैसे की जा सकती है.

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