झुंझुनू के विवेक कुमार बने पीएम मोदी के निजी सचिव, जिले में खुशी की लहर
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झुंझुनू के विवेक कुमार बने पीएम मोदी के निजी सचिव, जिले में खुशी की लहर

By Aaj Tak calender  22-Jul-2019

झुंझुनू के विवेक कुमार बने पीएम मोदी के निजी सचिव, जिले में खुशी की लहर

राजस्थान के झुंझुनू जिले के आईएफएस विवेक कुमार को प्रधानमंत्री का निजी सचिव बनाया गया है. वह झुंझुनू जिले के बहादुर वास गांव के रहने वाले हैं. विवेक कुमार  को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निजी सचिव बनाए जाने के बाद बहादुर वास गांव सहित पूरे जिले में खुशी की लहर है. 46 साल के विवेक कुमार भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं. उनके पिता राधाकिशन जानू रेलवे पुलिस में थे और इसी कारण वे राजस्थान के कई जिलों में पोस्टेड थे. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर रहते हुए भरतपुर पुलिस लाइन में उनका निधन हो गया था.
विवेक ने आईआईटी मुंबई से पढ़ाई की है. पहले प्रयास में ही वह 2004 में भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी चुने गए. पहली पोस्टिंग उनकी रूस में हुई. इसके बाद वे आस्ट्रेलिया में भी रहे. 2014 में विवेक कुमार पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के कार्यकाल में पीएमओ में डिप्टी डायरेक्टर डिफेंस के पद पर नियुक्त किए गए थे. इसके बाद से विदेश संबंधी मामलों का काम देख रहे थे. मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से विवेक कुमार पीएमओ में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं.
विवेक के पिता राधा किशन जानू की प्रतिमा भी गांव में लगाई गई है. उनके परिजनों का तो खुशी का ठिकाना नहीं है. विवेक कुमार के परिजनों ने बताया कि यह गांव के लिए गर्व करने वाली बात है कि उनके लाडले को प्रधानमंत्री का निजी सचिव बनाया गया है. वहीं बुजुर्गों ने भी इसे युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बताते हुए कहा कि गांव और झुंझुनू जिले के लिए गौरव की बात है कि छोटे से गांव बहादुरवास का बेटा प्रधानमंत्री के निजी सचिव बनाए गए हैं.
 
इसी इलाके से आने वाले पूर्व सांसद जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बनाये गए हैं. वह केशरी नाथ त्रिपाठी की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल पूरा हो रहा है. जगदीप धनखड़ सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हैं. इसके अलावा वह राजस्थान के झुंझुनू से लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं. वर्ष 1989 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने झुंझुनू से अपना प्रत्याशी उतारने की बजाय गठबंधन के तहत जनता दल प्रत्याशी जगदीप धनखड़ का समर्थन किया था. लेकिन जब 1991 में हुए लोकसभा चुनावों में जनता दल ने जगदीप धनखड़ का टिकट काट दिया तो वह पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए और अजमेर से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें वहां हार का मुंह देखना पड़ा.
धनखड़ किशनगढ़ क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं. जाटों को ओबीसी दर्जा दिलाने के लिए धनखड़ ने काफी प्रयास किए. वह विभिन्न सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे हैं. पश्चिम बंगाल में उनके सामने कानून का शासन बनाए रखने की बड़ी चुनौती होगी क्योंकि यही वह राज्य है जहां देश में सर्वाधिक राजनीतिक हिंसा होती है. साथ ही भाजपा सरकार ने धनखड़ को राज्यपाल बनाकर जाट समुदाय को भी लुभाने का प्रयास किया है. वही जगदीप धनकड़ को राज्यपाल बनाने पर लोगों ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया है.

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