नेताओं को सिर्फ़ चुनाव की चिंता, 27000 गाँव सूखे की चपेट में
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नेताओं को सिर्फ़ चुनाव की चिंता, 27000 गाँव सूखे की चपेट में

By SatyaHindi   03-May-2019

नेताओं को सिर्फ़ चुनाव की चिंता, 27000 गाँव सूखे की चपेट में

लोकसभा चुनाव के नतीजे आये भी नहीं हैं, लेकिन महाराष्ट्र में अगले संघर्ष की बिसात बिछने लगी है। जिस दिन महाराष्ट्र में 17 सीटों पर चौथे चरण का मतदान हो रहा था उस दिन राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख शरद पवार अकाल प्रभावित सोलापुर और उस्मानाबाद का दौरा सड़क मार्ग से कर रहे थे। अब पवार ने अगली रणनीति तय करने के लिए 4 मई को पार्टी के सभी विधायकों, ज़िलाध्यक्षों, लोकसभा का चुनाव लड़े प्रत्याशियों, प्रदेश व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।

चुनाव प्रचार के दौरान कई बार दिए गए अपने साक्षात्कारों में भी पवार इस बात का इशारा दे चुके हैं कि सूखे को लेकर किसान बहुत परेशान हैं। चारा छावनियों में चारा नहीं होने के कारण किसान जानवरों को उनके हाल पर छोड़ दे रहे हैं क्योंकि बाजार में चारा इतना महँगा है कि किसान अपना परिवार का पेट भरे या अपने पशुओं का। अब पवार के बाद इस चुनाव में उनके अप्रत्यक्ष सारथी की भूमिका निभाने वाले राज ठाकरे ने भी सूखा पीड़ित क्षेत्रों के दौरे करने की योजना बनायी है।

लोकसभा चुनाव में 10 लगातार सभाएँ लेकर महाराष्ट्र में नरेंद्र मोदी और अमित शाह विरोधी माहौल तैयार करने का प्रयास कर चुके राज ठाकरे ने 1 मई को महाराष्ट्र के स्थापना दिवस पर अपने ट्विटर हैंडल से एक अपील ट्वीट की है जिसमें उन्होंने कहा है कि दो सप्ताह चुनाव प्रचार में बीत गया लेकिन न तो मीडिया और न ही सरकार का ध्यान प्रदेश में पड़े सूखे की तरफ़ गया। उन्होंने कहा कि प्रचार सभाओं के चलते प्रदेश में वह जितना घूम चुके हैं उस दौरान यह पता चला कि बेरोज़गारी और अकाल दो बड़ी समस्याएँ हैं जिनसे लोग जूझ रहे हैं। इनको लेकर सरकार जितने दावे करती है, सब खोखले हैं। वह कहते हैं लोग मदद के लिए आगे भी आना चाहते हैं लेकिन सरकारी मशीनरी ही कहीं न कहीं बाधक बन जाती है। इसलिए लोगों को इस सरकार को सबक़ सिखाने के लिए आगे आना होगा। 

एक बैठक कांग्रेस पार्टी की भी होने की ख़बर है जिसमें राधा कृष्ण विखे पाटिल के इस्तीफ़े के बाद खाली हुए विपक्षी दल के नेता पद पर चुनाव के लिए चर्चा होगी। इसके साथ ही चुनाव की समीक्षा भी होगी। वहीं अब राज ठाकरे ने सूखे को लेकर राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाये हैं। इसे देख ऐसा लगता है कि लोकसभा चुनाव परिणाम का भी इंतज़ार नहीं कर पार्टियाँ विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने में जुट गयी हैं।

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