संग-साथ से चली विरासत की सियासत में अब ताकत की लड़ाई है
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संग-साथ से चली विरासत की सियासत में अब ताकत की लड़ाई है

By Bhaskar   14-Apr-2019

संग-साथ से चली विरासत की सियासत में अब ताकत की लड़ाई है

नागौर लोकसभा सीट। इससे जुड़े क्षेत्र को राजस्थान का जाट हार्ट लैंड कहते हैं। इसी चुनाव में नहीं, बल्कि सभी चुनावों में हर मुद्दे से अलग जाट हार्टलैंड पूरे राजस्थान में अपनी धमक दिखाने वाला चौधरी ही चुनता है। वक्त के साथ इस सीट ने सियासत के कई अनोखे फलसफे गढ़े हैं। इस बार भी दिख रहा है राजनीति का नया मोड़।
इस बार चौधराहट की इस रस्साकशी के दोनों छोर बाबा की विरासत के हाथों में हैं। बाबा, यानी नाथूराम मिर्धा। राजस्थान का कद्दावर चेहरा। एक छोर पकड़े है सबके बाबा की अपनी पोती ज्योति तो दूसरा सिरा है बाबा के खास रहे रामदेव के बेटे हनुमान बेनीवाल के हाथों में। कांग्रेस टिकट पर लड़ रहीं ज्योति मिर्धा 2009 में यहीं से सांसद चुनी गई थीं, लेकिन 2014 के पिछले चुनाव में वे भाजपा उम्मीदवार सीआर चौधरी से 75,218 वोटों से हार गईं।
इस चुनाव में हनुमान बेनीवाल निर्दलीय लड़े थे और 159980 वोट ले गए। लिहाजा ज्योति की हार की वजह बेनीवाल को माना गया। अब बेनीवाल भाजपा के गठबंधन उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। राजस्थान में इसी एकमात्र लोकसभा सीट पर भाजपा ने चुनावी गठबंधन किया है। सियासी हलकों की चर्चा है कि हाल के विधानसभा चुनावों में ज्योति मिर्धा ने खींवसर सीट पर हनुमान बेनीवाल को हराने के लिए पूरा दमखम लगा दिया था। इसीलिए अब बेनीवाल उनके खिलाफ चुनावी ताल ठोंक रहे हैं।

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