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रिपोर्ट्स • दिल्ली

चुनाव आयोग की चुप्पी और जंतर-मंतर पर विपक्ष का महासंग्राम: Rahul - Priyanka हिरासत में

चुनाव आयोग के खिलाफ जंतर-मंतर पर विपक्ष का प्रदर्शन, राहुल-प्रियंका हिरासत में।

चुनाव आयोग की चुप्पी और जंतर-मंतर पर विपक्ष का महासंग्राम: Rahul - Priyanka हिरासत में
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नई दिल्ली में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। संसद से चुनाव आयोग तक मार्च करने की योजना के तहत विपक्ष के करीब 300 सांसद और नेता सड़क पर उतरे, जिसके बाद राजधानी में भारी प्रशासनिक तनाव और संघर्ष की स्थिति बन गई।

विपक्षी दलों का आरोप है कि 30 सितंबर की बैठक में ही 6 अक्टूबर को मार्च निकालने का ऐलान कर दिया गया था, इसके बावजूद चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस ने पहले से कोई अनुमति न होने का हवाला देकर रास्ता रोक दिया। आकाशवाणी भवन के पास राहुल गांधी लगभग आठ घंटे तक एक पेड़ के नीचे बैठे रहे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से मिलकर 'वोट चोरी' के विरोध पर बात करने की मांग की। हालांकि, आयोग की ओर से दिनभर कोई प्रतिक्रिया या मिलने का न्योता नहीं आया, और देर रात एक बयान जारी कर कहा गया कि उन्हें इस मार्च की कोई पूर्व सूचना नहीं थी।

अगले दिन, 7 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। इसके तुरंत बाद, INDIA गठबंधन के नेताओं ने जनपथ पर लंच के दौरान जंतर-मंतर तक मार्च करने का नया कार्यक्रम तय किया। जब सांसद बसों में सवार होकर जंतर-मंतर की ओर निकले, तो पुलिस ने अशोका रोड पर उन्हें रोक लिया। इसके विरोध में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेता बसों से उतरकर सड़क पर धरने पर बैठ गए।

स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को घेरकर जबरन बसों में भरना शुरू किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और महुआ मोइत्रा समेत लगभग 90-91 नेताओं और सांसदों को हिरासत में ले लिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने इस दौरान भारी सख्ती बरती और बस के अंदर भी धक्का-मुक्की की गई।

एक तरफ जहां विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों से नाम कटने और फिर भारी मात्रा में उनके वापस जुड़ने के आंकड़ों पर तीखे सवाल खड़े कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। अब 10 तारीख को छात्र संगठनों (CJP और अन्य) द्वारा एक बड़े कलेक्टिव प्रोटेस्ट की घोषणा की गई है, जिससे यह साफ है कि यह राजनीतिक टकराव अभी थमने वाला नहीं है।
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