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ECI- NET पोर्टल और वोटर लिस्ट नियंत्रण का विवाद: सॉफ्टवेयर से बंधे अधिकारियों के हाथ?

ECI- NET सॉफ्टवेयर के जरिए ईआरओ के अधिकारों पर नियंत्रण और दिल्ली-बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े विशेष नियमों पर बड़ा खुलासा।

ECI- NET पोर्टल और वोटर लिस्ट नियंत्रण का विवाद: सॉफ्टवेयर से बंधे अधिकारियों के हाथ?
फोटो: ECI-NET, Electoral Registration Officer, Voter List, SIR, VIP Voter

संसद द्वारा पारित रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट 1950 के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में एक इलेक्ट्रोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) नियुक्त होता है, जिसके पास वोटर लिस्ट तैयार करने और उसमें सुधार करने का वैधानिक अधिकार होता है। लेकिन हाल ही में चुनाव आयोग के यूनिफाइड डिजिटल पोर्टल 'ईसीआई-नेट' (ECI-NET) की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तकनीकी ऑडिट में सामने आया है कि इस सॉफ्टवेयर के जरिए चुनाव आयोग ने ईआरओ के स्वतंत्र और कानूनी अधिकारों को अपने नियंत्रण में जकड़ लिया है।

 

डेटा साइंटिस्ट सौरभ राजपूत द्वारा किए गए ईसीआई-नेट के फ्रंटएंड कोड के ऑडिट से पता चला कि पोर्टल में ऐसे 'ऑन-ऑफ' स्विच और कोडिंग मौजूद हैं, जिनकी मदद से किसी भी राज्य के ईआरओ या स्टेट नोडल ऑफिसर (SNO) की पहुंच को सॉफ्टवेयर स्तर पर प्रतिबंधित या पूरी तरह बंद किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, पश्चिम बंगाल के ईआरओ और एईआरओ के लिए 'व्यू इन्यूमरेशन फॉर्म डिटेल्स' और 'नोटिस एंड हियरिंग डैशबोर्ड' जैसी महत्वपूर्ण टाइल्स को कोड के जरिए विशेष रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिससे वे जरूरी दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच से वंचित हो जाते हैं।

 

दूसरी ओर, दिल्ली में इसी पोर्टल और ऐप के जरिए एक 'मार्क वीआईपी' फीचर भी जोड़ा गया है। दिल्ली में आधे से अधिक वोटरों पर 'अनमैप्ड' या 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' का ठप्पा लगने के बावजूद, मंत्रियों, नौकरशाहों, न्यायविदों और चुनिंदा हस्तियों को वीआईपी श्रेणी में रखकर विशेष सहूलियतें दी जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वीआईपी वोटरों के मामलों में नोटिस भेजने के बजाय सीधे बीएलओ को घर भेजा जाता है और सामान्य औपचारिकताओं के बिना दस्तावेज लेकर प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है, जबकि आम नागरिकों को कड़ी छानबीन का सामना करना पड़ता है।

 

इस केंद्रीकरण और सॉफ्टवेयर आधारित नियंत्रण पर आयोग के भीतर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ईसीआई-नेट के इन फंक्शनों पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह वोटर रोल डेटाबेस के केंद्रीयकरण के जरिए ईआरओ के वैधानिक अधिकारों को ओवर-रूल कर रहा है। बिना किसी कानूनी संशोधन या लिखित आदेश के केवल सॉफ्टवेयर स्विच के जरिए अधिकारियों के हाथ बांधना चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर- https://youtu.be/eF5XnNp85zk?si=K72XnnswiMaxchsp

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