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रिपोर्ट्स • दिल्ली

'चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं': जब राजनीतिक शून्य ने युवाओं को सड़कों पर धकेला

राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी और आर्थिक संकट से जूझ रही युवा पीढ़ी सड़कों को संसद बनाने पर मजबूर हो गई है।

'चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं': जब राजनीतिक शून्य ने युवाओं को सड़कों पर धकेला
फोटो: युवा विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, एदी रमा, जन-आक्रोश, लोकतंत्र

अल्बानिया के प्रधानमंत्री एदी रमा का यह कथन—"हमने चुनाव कराए थे, क्रांति नहीं"—आज के वैश्विक राजनीतिक गतिरोध को सटीक रूप से दर्शाता है। 30 साल से कम उम्र के युवाओं को मुख्यधारा की राजनीति और संसद में पर्याप्त जगह न मिलने के कारण अब सड़कों को ही संसद बनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

 

इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर के कुल सांसदों में 30 वर्ष या उससे कम उम्र के सांसदों की हिस्सेदारी मात्र 2.8 प्रतिशत है, जबकि एक-तिहाई से अधिक संसदीय सदनों में इस आयु वर्ग का एक भी प्रतिनिधि नहीं है। दूसरी ओर, यूरोस्टैट का डेटा बताता है कि स्पेन, इटली और क्रोएशिया जैसे देशों में युवा महंगाई और अत्यधिक किराए के कारण 30 वर्ष की उम्र के बाद भी अपने माता-पिता का घर छोड़ने में असमर्थ हैं।

 

यह असंतोष अब हिंसक विरोध प्रदर्शनों में बदल चुका है:

  • फ्रांस और बेल्जियम: बजट कटौती, फीस वृद्धि और शिक्षकों की कमी के विरोध में छात्रों ने सड़कों पर प्रदर्शन किए, जहाँ पुलिस के बल प्रयोग और सैकड़ों गिरफ्तारियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

  • स्पेन और इटली: स्पेन में भारी किराए के खिलाफ बने टेंट-सिटी के जनाक्रोश ने सरकार को मध्यावधि चुनाव के लिए मजबूर किया, वहीं इटली में 'नो मेलोनी डे' के तहत छात्रों ने शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की खस्ताहाली का विरोध किया।

  • अल्बेनिया: पर्यावरण संरक्षण और संरक्षित क्षेत्रों में बड़े व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स के खिलाफ 3 महीने तक चले शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन को अनसुना किए जाने पर आक्रोश फूटा।

 

दक्षिण एशिया में नेपाल का 'जेन-जी' (Gen-Z) आंदोलन और बांग्लादेश का छात्र कोटा आंदोलन इस बात का प्रमाण हैं कि जब संसदीय रास्ते बंद होते हैं, तो सड़कें सत्ता तक को उखाड़ फेंकती हैं। हालांकि, क्रांति के बाद भी पुरानी राजनीतिक ताकतों का दबदबा यह सवाल खड़ा करता है कि क्या मात्र सरकार बदलना ही इस संकट का हल है? जब तक लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं युवाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व और समाधान नहीं देंगी, तब तक सड़कों का यह आक्रोश थमता नजर नहीं आता।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर- https://youtu.be/R-ijwPnBKKM?si=2Ug_j0n3-gA3YIq-

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