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"डर और सनसनी बेचने वाला गोदी मीडिया": स्वतंत्र पत्रकारिता और मेनस्ट्रीम मीडिया की कार्यशैली पर बड़ा सवाल

मेनस्ट्रीम मीडिया के प्रोपेगेंडा और सांप्रदायिक हेडलाइंस पर बड़ा खुलासा, स्वतंत्र पत्रकारिता पर बहस तेज।

"डर और सनसनी बेचने वाला गोदी मीडिया": स्वतंत्र पत्रकारिता और मेनस्ट्रीम मीडिया की कार्यशैली पर बड़ा सवाल
फोटो: Mainstream Media Bias India, NBDSA Action News Channels, Independent Journalism India, CJP Media Report 2026, TV News Sensationalism

नई दिल्ली: हाल ही में सामने आए एक वीडियो और मीडिया विश्लेषण रिपोर्ट के जरिए देश के मुख्यधारा के मीडिया (गोदी मीडिया) और स्वतंत्र पत्रकारों की कार्यशैली पर तीखी बहस छिड़ गई है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि किस प्रकार टीवी चैनल्स और उनके एंकर स्टूडियो में बैठकर सनसनीखेज खबरें परोसते हैं, जबकि जमीनी हकीकत को दबा दिया जाता है।

 

एनबीडीएसए की फटकार और जुर्माने का सिलसिला

न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) और अदालतों द्वारा लगातार ज़ी न्यूज़, न्यूज़ 18 इंडिया, टाइम्स नाउ नव भारत और रिपब्लिक टीवी जैसे बड़े चैनलों पर कार्रवाई की जाती रही है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के छात्र प्रदर्शन को 'पलेस्टीन लविंग गैंग' बताना, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर आपत्तिजनक टिप्पणी, किसान आंदोलन को खालिस्तानी साजिश करार देना, और हिजाब विवाद जैसे मामलों में इन चैनलों पर भारी जुर्माने लगाए गए हैं और आपत्तिजनक वीडियो हटाने के आदेश दिए गए हैं। इसके बावजूद मेनस्ट्रीम मीडिया के रवैये में कोई सुधार नहीं आया है।

 

थंबनेल्स और सांप्रदायिक एजेंडे के जरिए डर का माहौल

सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की रिपोर्ट के अनुसार, अब चैनलों ने अपनी ऑनलाइन रीच और टीआरपी बढ़ाने के लिए यूट्यूब थंबनेल्स और हेडलाइंस में खतरनाक और सांप्रदायिक शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 'वक्फ कानून', 'लव जिहाद' या हालिया इंडिया ब्लॉक के चुनाव आयोग मार्च जैसे मुद्दों पर 'मुसलमानों में भगदड़', 'मियां जी का नया खौफ', और 'मोदी बनाम मौलाना' जैसे भड़काऊ कैप्शंस के जरिए समाज में डर और नफरत फैलाने की कोशिश की जाती है।

विश्लेषकों का मानना है कि जब मीडिया टीआरपी, राजनीतिक दबाव और किसी खास विचारधारा के आगे झुक जाती है, तो वह समाज को गुमराह करती है। ऐसे में यह तय करना होगा कि देश को डर बेचने वाला परतंत्र मीडिया चाहिए या फिर सच दिखाने वाला स्वतंत्र पत्रकारिता तंत्र।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://youtu.be/AQf6CAHST9k?si=E3NHI-vcpd-KMsMX

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