दिल्ली में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों के अधिकारों की बात करने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार पर राज्य में मीडिया को नियंत्रित करने के आरोप लगे हैं। एक YouTube इंटरव्यू में RTI कार्यकर्ता मानिक गोयल ने दावा किया कि सरकारी विज्ञापनों, पुलिस कार्रवाई, FIR और कॉपीराइट स्ट्राइक के माध्यम से सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दबाव बनाया जा रहा है। बातचीत में सरकारी खर्च, मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए कथित निजी विमान के टेंडर, विरोध प्रदर्शन और सूचना के अधिकार (RTI) की स्थिति पर भी सवाल उठाए गए।
सरकारी विज्ञापनों से मीडिया पर दबाव बनाने का आरोप
मानिक गोयल का दावा है कि पंजाब में मीडिया का बड़ा हिस्सा सरकारी विज्ञापनों और प्रोडक्शन से मिलने वाले भुगतान पर निर्भर है। उनके मुताबिक, सरकार की आलोचना करने वाली खबरें प्रकाशित या प्रसारित करने पर कुछ मीडिया संस्थानों के विज्ञापन रोकने, टीवी चैनलों को केबल नेटवर्क से हटवाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का दबाव बनाया जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संस्थानों को सरकारी विज्ञापन और वीडियो बनाने के लिए भुगतान देकर अनुकूल कवरेज के लिए प्रभावित किया जाता है। गोयल ने यह भी दावा किया कि कुछ स्वतंत्र पत्रकारों की वेबसाइटों को सरकारी विज्ञापन पैनल में शामिल करके उन्हें आर्थिक लाभ दिया गया। उनके अनुसार, विज्ञापन लेने के बाद जब कोई संस्थान सरकार के वादों, सड़कों की खराब स्थिति या अन्य सार्वजनिक मुद्दों पर सवाल उठाता है, तो उससे जवाब मांगा जाता है कि विज्ञापन मिलने के बावजूद सरकार के खिलाफ खबर क्यों चलाई गई।
इंटरव्यू में सरकारी विज्ञापन खर्च को लेकर सालाना लगभग 5,000 से 6,000 करोड़ रुपये का अनुमान भी बताया गया। हालांकि, बातचीत में इस आंकड़े के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
निजी विमान और सरकारी रैलियों के खर्च पर सवाल
गोयल ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने नेताओं की यात्राओं के लिए लग्जरी विमान से संबंधित टेंडर जारी किया था। उनके मुताबिक, इस विमान का इस्तेमाल अरविंद केजरीवाल की पंजाब यात्राओं में किया जाता है, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान हेलीकॉप्टर से यात्रा करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में जनता नेताओं से सादगी और चुनावी वादों को पूरा करने की अपेक्षा करती है, इसलिए महंगी यात्राओं पर खर्च सवालों के घेरे में है।
उन्होंने मानसा के पास एक रैली का उदाहरण देते हुए दावा किया कि ऐसे कार्यक्रमों के लिए दिल्ली से तीन से चार करोड़ रुपये तक के टेंट मंगवाए जाते हैं और कुल आयोजन पर 15 से 20 करोड़ रुपये तक खर्च हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी की रैलियों को सरकारी कार्यक्रम या 'राज्य समागम' बताकर पेश किया जाता है तथा नियमित विकास कार्यों को एक साथ जोड़कर बड़े उद्घाटनों के रूप में प्रचारित किया जाता है।
गोयल के अनुसार, विमान संबंधी टेंडर दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थे और उन्होंने इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे पर उन्हें और कुछ पत्रकारों को FIR का सामना करना पड़ा। उनके मुताबिक, इस मामले में हाई कोर्ट से राहत मिली और जांच रोकने के निर्देश दिए गए। इंटरव्यू में संबंधित आदेश या FIR की प्रतियां विस्तार से नहीं दिखाई गईं।
कॉपीराइट स्ट्राइक से डिजिटल पेज बंद होने का दावा
इंटरव्यू का एक प्रमुख मुद्दा आम आदमी पार्टी पंजाब के सोशल मीडिया पेज से भेजी गई कथित कॉपीराइट स्ट्राइक का था। गोयल ने बताया कि सरकारी विधानसभा फुटेज या मुख्यमंत्री भगवंत मान की तस्वीरों का इस्तेमाल करके खबरें और पोस्ट बनाने वाले कुछ पेजों पर कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायतें की गईं।
उनका सवाल था कि सरकारी खर्च से तैयार हुई सामग्री और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों पर राजनीतिक पार्टी का कॉपीराइट किस आधार पर लागू किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अक्टूबर से जनवरी-अप्रैल के बीच लगभग 48 वीडियो पर कॉपीराइट उल्लंघन की शिकायतें की गईं और चार पेज बंद हो गए थे, जिन्हें बाद में बहाल कर दिया गया।
गोयल ने कहा कि इस कार्रवाई के डर से कुछ पत्रकारों ने पुरानी पोस्ट हटानी शुरू कर दीं। उन्होंने बठिंडा के एक डिजिटल क्रिएटर का उदाहरण भी दिया, जिसके सात साल पुराने चैनल पर कथित तौर पर 14 लाख सब्सक्राइबर थे और कॉपीराइट कार्रवाई के बाद उसका पेज बंद हो गया। इन मामलों के स्वतंत्र सत्यापन के लिए संबंधित प्लेटफॉर्म के रिकॉर्ड और शिकायतों की जानकारी आवश्यक है।
विरोध प्रदर्शन और RTI व्यवस्था पर भी उठे सवाल
गोयल ने मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम के दौरान काला झंडा दिखाकर नशे की समस्या पर सवाल उठाने वाले व्यक्ति के साथ कथित पुलिस दुर्व्यवहार का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद प्रताड़ित किया गया। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच या आधिकारिक प्रतिक्रिया इंटरव्यू में प्रस्तुत नहीं की गई।
RTI व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि पंजाब में पहले दस सूचना आयुक्त कार्यरत थे, लेकिन उनके सेवानिवृत्त होने के बाद लंबे समय तक नए आयुक्त नियुक्त नहीं किए गए। उनके मुताबिक, इससे दूसरी अपीलों का बैकलॉग बढ़ा और कई मामलों की सुनवाई में दो साल तक की देरी होने लगी। उन्होंने नियुक्तियों में राजनीतिक पक्षपात का आरोप भी लगाया।
गोयल ने कहा कि सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को विज्ञापन, पुलिस फोन, FIR और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉपीराइट शिकायतों जैसी कार्रवाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मीडिया संस्थानों के स्थानीय संवाददाताओं को प्रभावित करके खबरों की कवरेज सीमित की जाती है।
इंटरव्यू के अंत में वक्ताओं ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं। पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी का पक्ष इस स्क्रिप्ट में विस्तार से शामिल नहीं है। इसलिए लगाए गए आरोपों पर निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित दस्तावेजों, सरकारी जवाब और स्वतंत्र जांच की जरूरत है।
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