नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (2022) में न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता का दिल्ली स्थित इंडिया गेट के सामने धरना जारी है। हाल ही में मामले में नामजद संदिग्ध भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के फैसले के विरोध में महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पीड़ितों के जख्मों को खुरेदने जैसा फैसला'
प्रदर्शन स्थल पर पहुंची महिला नेताओं और एक्टिविस्ट्स ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चार साल से एक लाचार परिवार अपनी बेटी के न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, जबकि सीबीआई जांच की गति बेहद धीमी रही है। ऐसे समय में मामले से जुड़े प्रमुख नाम को राज्यपाल बना देना पीड़िता के परिवार के जख्मों पर थप्पड़ मारने जैसा है।
नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
"जब भी किसी वीआईपी का नाम ऐसे गंभीर मामलों में सामने आता है, सरकार जांच पूरी होने का इंतजार करने के बजाय उन्हें संवैधानिक पदों पर बिठाकर कानूनी 'इम्युनिटी' (सुरक्षा घेरा) प्रदान कर देती है। यह फैसला किसी वीआईपी को बचाने और जांच के तार ऊपर तक पहुंचने से रोकने की कोशिश है।"
'नारी सुरक्षा और बेटी बचाओ के दावों की खुली पोल'
महिला नेताओं ने कुलदीप सिंह सेंगर (उन्नाव), बृजभूषण शरण सिंह, और बिलकिस बानो मामलों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल का हमेशा से अपराधियों और आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण देने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का प्रचार करती है, वहीं दूसरी तरफ ऋषिकेश रिसॉर्ट में रिसॉर्ट स्टाफ और अंकिता जैसी बेटियों पर अनैतिक दबाव बनाने वालों को बढ़ावा दिया जाता है। जब अंकिता ने इसका विरोध किया, तो उसकी हत्या कर दी गई।
मुख्य मांगे और आगे का संघर्ष
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के सामने दो मुख्य मांगें रखी हैं:
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दुष्यंत कुमार गौतम को तत्काल राज्यपाल पद से हटाया जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया बाधित न हो।
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अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच की गति तेज की जाए और मामले में शामिल सभी वीआईपी चेहरों को बेनकाब किया जाए।





