“हम भीख नहीं मांग रहे, ये हक़ है”- फारूक अब्दुल्ला
राज्य के विशेष दर्जे की बहाली की मांग को लेकर अब्दुल्ला ने कहा, “हम यहां भीख मांगने नहीं आए हैं। एक भारतीय नागरिक के नाते यह हमारा संवैधानिक अधिकार है कि हमारा राज्य बहाल किया जाए। केंद्र सरकार का 2019 में लिया गया फैसला असंवैधानिक था। यहां तक कि राज्यपाल ने खुद कहा कि उन्हें कानून की जानकारी नहीं थी — क्या ऐसे राज्यों को खत्म किया जाता है?”
उन्होंने देश की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा, “आज हमें हमारी भाषा, धर्म और पहचान के आधार पर देखा जाता है। यह वह भारत नहीं है, जिसका सपना गांधी ने देखा था। पाकिस्तान से धार्मिक समानता के बावजूद हमने गांधी को चुना। काश, वे नेता आज होते और देख पाते कि देश क्या बन गया है।”
जम्मू-कश्मीर के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने भी राज्य की संवैधानिक स्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “भारत जम्मू-कश्मीर को अपना सिरमौर कहता है, लेकिन उसी ‘मुखिया’ को गंभीर चोट दी गई है। समझ नहीं आता कि किस कानून के तहत एक राज्य को नगर निगम में बदल दिया गया।”
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 370 को लेकर दिए फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “अगर सर्वोच्च अदालत यह मानती है कि अनुच्छेद 370 हटाने की प्रक्रिया सही नहीं थी, तो फिर उसे बरकरार कैसे रखा गया? यह एक ऐसा फैसला है, जिसकी समीक्षा जरूरी है।”





