दरअसल, मनीष सिसोदिया बीते 11 दिनों से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में शामिल थे। शनिवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर खुद इस बात की जानकारी दी। सिसोदिया ने बताया कि वह आत्मिक शांति और अंतर्मन के अवलोकन के लिए विपश्यना केंद्र गए थे, जहां उन्होंने न केवल मौन साधना की बल्कि खुद के भीतर झांकने का अवसर भी मिला। इस दौरान उनका फोन भी बंद था और वह पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटा हुआ जीवन जी रहे थे। अब जब वह इस शिविर से लौटे हैं तो खुद को पहले से कहीं अधिक शांत और ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं।
मनीष सिसोदिया ने विपश्यना शिविर के अनुभव साझा किए
पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने एक्स पर लिखा, "पिछले 11 दिन से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में था। मौन, एकांत और अपने ही अंतर्मन का अवलोकन। फोन भी बंद था और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ। आज सुबह ही शिविर पूरा हुआ है।" सिसोदिया ने इस अनुभव को गहरी आध्यात्मिक यात्रा बताते हुए कहा कि यह केवल ध्यान नहीं था बल्कि मन और शरीर को समझने की एक अनोखी प्रक्रिया थी।
उन्होंने बताया कि दिन में 12 घंटे केवल अपनी सांसों को देखना, बिना किसी प्रतिक्रिया के बस अपने मन और शरीर के उतार-चढ़ाव को समझना आसान नहीं था। लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने इस प्रक्रिया के माध्यम से एक अनोखी शांति का अनुभव किया। मनीष सिसोदिया ने इस अनुभव को गौतम बुद्ध की सीख से जोड़ा और कहा, "गौतम बुद्ध ने हमें सिखाया कि चीजों को वैसा ही देखना चाहिए, जैसा वह वास्तव में हैं, न कि जैसा हम उन्हें देखना चाहते हैं।"
मनीष सिसोदिया ने विपश्यना ध्यान शिविर के दौरान अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन 11 दिनों में कोई संवाद नहीं था। न फोन, न किताबें, न लेखन, न किसी से नजर मिलाना। पूरा शिविर मौन और एकांत पर आधारित था। शुरुआत के कुछ दिन दिमाग में असहजता और बेचैनी बनी रही लेकिन धीरे-धीरे समय थमने लगा और उन्होंने एक अद्भुत शांति का अनुभव किया।
सिसोदिया ने लिखा, "शिविर के दौरान सबसे दिलचस्प बात यह लगी कि इसमें 75 प्रतिशत लोग 20 से 35 साल के युवा थे। जब अंतिम दिन बातचीत की अनुमति मिली तो मैंने पाया कि यह युवा पीढ़ी खुद के भीतर शांति और मानसिक सुकून पाने के लिए इतनी कम उम्र में ही विपश्यना का सहारा ले रही है।"
उन्होंने आगे लिखा कि युवाओं की शिकायत यह थी कि जिस शिक्षा ने उन्हें सफलता की दौड़ में शामिल किया, अगर उसी शिक्षा प्रणाली ने उन्हें मानसिक संतुलन और आंतरिक शांति बनाए रखने का तरीका भी सिखाया होता, तो उनकी ज़िंदगी और अधिक खुशहाल हो सकती थी। सिसोदिया ने इसे अपने लिए एक भावुक क्षण बताते हुए कहा कि यह सुनकर उन्हें गर्व हुआ कि जब वह दिल्ली के शिक्षा मंत्री थे, तब उन्होंने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हैप्पीनेस करिकुलम की शुरुआत की थी।
उन्होंने कहा, "मुझे खुशी है कि जब मैं दिल्ली का शिक्षा मंत्री था, तब स्कूलों में हैप्पीनेस क्लास की शुरुआत करा सका। यह शिक्षा के मानवीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम था। विपश्यना शिविर में शामिल युवाओं ने इस पाठ्यक्रम का जिक्र किया तो मुझे महसूस हुआ कि हमने शिक्षा के क्षेत्र में सही दिशा में कदम बढ़ाए थे।" मनीष सिसोदिया ने पोस्ट के अंत में लिखा कि वह आज शाम तक दिल्ली लौटेंगे और अब वह एक नई ऊर्जा और नए जोश के साथ फिर से काम पर लौटेंगे। उन्होंने इस अनुभव को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि विपश्यना ने उन्हें मानसिक स्थिरता और जीवन को देखने का एक नया दृष्टिकोण दिया है।
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