रिपोर्ट्स के मुताबिक, 26 मार्च को मोथाबाड़ी मस्जिद में नमाज के दौरान एक जुलूस वहां से गुजरा, जिसमें धार्मिक नारे लगाए गए। अगले दिन, 27 मार्च को दूसरे समुदाय ने इसका विरोध किया, जिसके बाद हालात बिगड़ गए। देखते ही देखते भीड़ ने दुकानों, घरों और वाहनों में तोड़फोड़ और लूटपाट शुरू कर दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, 27 मार्च को हुए प्रदर्शन में धार्मिक झंडे लिए प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे। अचानक माहौल हिंसक हो गया, और भीड़ ने सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी, दुकानों में तोड़फोड़ की और लूटपाट की। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।
मालदा पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व जानबूझकर हिंसा भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि अगर किसी तरह की अफवाह की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने दावा किया कि हिंसा के दौरान हिंदू मंदिरों और घरों में तोड़फोड़ की गई।
उन्होंने कहा,
"बंगाल में बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? हमने राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस और गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय से संपर्क किया है।"
इसके अलावा, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी राज्यपाल को पत्र लिखकर मांग की है कि मोथाबाड़ी में केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) की तैनाती की जाए। उन्होंने राज्य सरकार पर अराजकता का आरोप लगाया और कहा कि TMC सरकार स्थिति को संभालने में नाकाम रही है। वहीं, मोथाबाड़ी से TMC विधायक सबीना यास्मीन ने दावा किया कि स्थिति अब नियंत्रण में है। उन्होंने कहा,
"हमने सभी समुदायों से शांति बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन ने शांति समिति की बैठक बुलाई है, जिसमें दोनों समुदायों के लोग शामिल होंगे।"
उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न देने का अनुरोध भी किया।
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