कुछ समय पहले हाईकोर्ट ने मस्जिद की रंगाई-पुताई के निर्देश दिए थे, जिसके अनुपालन में मस्जिद समिति ने बाहरी दीवारों पर पेंटिंग कराई थी।
ASI के अनुसार, यह निर्णय स्मारक की औपचारिक और ऐतिहासिक पहचान को लेकर उठाया गया है। नए नीले रंग के बोर्ड में 'जुमा मस्जिद, संभल' के साथ 'भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संरक्षित स्मारक' भी अंकित होगा। इस बोर्ड को फिलहाल मस्जिद के निकट बन रही पुलिस चौकी में अस्थायी रूप से रखा गया है, जिसे जल्द ही विवादित स्थल पर लगाया जाएगा।
ASI अधिकारियों के मुताबिक, यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि अब इस संपत्ति की ऐतिहासिक पहचान स्पष्ट हो गई है। नीले रंग का बोर्ड दर्शाता है कि यह स्थल ASI के अधीन एक संरक्षित स्मारक है और इसकी निगरानी अब पूरी तरह ASI द्वारा की जाएगी। इसके साथ ही, यह आम जनता को यह संदेश भी देगा कि स्थल पर किसी भी प्रकार की गतिविधि सीमित और निगरानी में होगी।
यह मामला 19 नवंबर 2024 को तब तूल पकड़ा, जब हिंदू पक्ष ने चंदौसी कोर्ट में दावा किया कि 'शाही जामा मस्जिद' वास्तव में 'श्री हरिहर मंदिर' है। इस याचिका के बाद विवाद गहराता गया और सर्वेक्षण की प्रक्रिया के दौरान तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न हो गया। हालात बिगड़ते गए और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि हिंसा भड़क उठी। पथराव और फायरिंग की घटनाओं में चार लोगों की जान चली गई, जबकि कई वाहन आग के हवाले कर दिए गए।
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