पल्लवी पटेल योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल के प्राविधिक शिक्षा विभाग के पॉलिटेक्निक कॉलेजों में हुए प्रमोशन का मुद्दा उठाना चाहती थीं। उनका आरोप था कि 250 से अधिक प्रवक्ताओं को 25-25 लाख रुपए लेकर एचओडी बनाया गया, जबकि यह नियुक्तियां केवल लोकसेवा आयोग के माध्यम से होनी चाहिए थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अवहेलना की गई, जिससे दलित और पिछड़े वर्ग को नुकसान हुआ।
सोमवार को जब पल्लवी ने यह मुद्दा उठाने का प्रयास किया, तो पूर्व अनुमति न होने के कारण स्पीकर ने अनुमति नहीं दी। इससे क्षुब्ध होकर उन्होंने विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष धरना दिया। रात्रि में संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने उनसे मिलकर धरना समाप्त करवाया। पल्लवी का दावा था कि उन्हें अगले दिन बोलने का आश्वासन दिया गया।
मंगलवार दोपहर तीन बजे जब पल्लवी ने पुनः मामला उठाने का प्रयास किया, तो स्पीकर ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 56 के अनुसार पूर्व आवेदन आवश्यक था। उस दिन नौ आवेदनों में से मात्र दो को ही अनुमति मिली थी। जब पल्लवी ने प्रमुख सचिव और सुरेश खन्ना की ओर संकेत करते हुए पिछली रात के आश्वासन का उल्लेख किया, तो स्पीकर ने कहा कि सदन केवल नियमों के अनुसार संचालित होता है।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने खड़े होकर स्पष्ट किया कि कोई आश्वासन नहीं दिया गया था। उन्होंने बताया कि धरने की सूचना मिलने पर वे केवल स्थिति का जायजा लेने गए थे और नियमानुसार कार्यवाही का आश्वासन दिया था।
पल्लवी के निरंतर बोलने के प्रयासों पर स्पीकर ने चेतावनी दी कि वे सदन को हाईजैक न करें, अन्यथा मामला एथिक्स कमेटी को भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 56 के तहत आज की नौ सूचनाओं में से केवल दो ही सुनी जाएंगी। जब पल्लवी ने कहा कि वह सुबह से बोलने के लिए उपस्थित हैं, तो स्पीकर ने कहा कि केवल लंबे समय तक बैठे रहने से किसी को बोलने का अधिकार नहीं मिल जाता। अंततः स्पीकर ने निर्देश दिया कि पल्लवी की कोई भी टिप्पणी कार्यवाही में दर्ज न की जाए।





