उन्होंने आगे कहा, "कितनी भी साजिश रचें, चरित्रहनन की कोशिश करें, अपना दल (एस) सामाजिक न्याय के मुद्दे उठाता रहेगा। चाहे जो भी कीमत चुकानी पड़े, सामाजिक न्याय की आवाज बंद नहीं होगी। चाहे 69 हजार शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी का मामला हो या अन्य मुद्दे, हमारी पार्टी ने पूरी ताकत से अपनी बात रखी है और आगे भी उसी मजबूती से रखेगी।"
पटेल ने सवाल उठाया कि धरनारत विधायक के साथ धरने पर बैठे और किसी बाहरी व्यक्ति से लगातार निर्देश प्राप्त कर रहे दो व्यक्ति कौन थे, जो उस समय देर रात राज्य के सबसे सुरक्षित परिसर विधानसभा में मौजूद थे—जहां सदन की कार्यवाही खत्म होने के बाद परिंदा भी पर नहीं मार सकता? किस पुलिस अधिकारी ने सारे नियमों को दरकिनार कर इन्हें विधानसभा परिसर में आने की अनुमति दी?
1700 करोड़ के बजट वाले राज्य के सूचना विभाग का कार्य माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी और माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी की सरकारों की नीतियों और कार्यक्रमों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना है। परंतु विभाग के कनिष्ठ अधिकारी इसका दुरुपयोग कर अपनी ही सरकार के मंत्रियों का मान-मर्दन और चरित्र हनन कर रहे हैं। क्या इनका कार्य मंत्रियों पर लगे झूठे आरोपों को रोकने के बजाय उन्हें बढ़ावा देना और अधूरे तथ्यों से भ्रम फैलाकर विरोधी खबरें प्रकाशित करवाना है?





