इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य न केवल भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले संगठनों की कमर तोड़ना था, बल्कि यह संदेश भी देना था कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। एयर स्ट्राइक के माध्यम से भारत ने यह स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम है।
वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान को अपने ही देश के भीतर भी गंभीर सुरक्षा संकट का सामना करना पड़ा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA), जो लंबे समय से पाकिस्तान से स्वतंत्रता की मांग को लेकर संघर्षरत है, ने बुधवार को दो अलग-अलग हमलों में पाकिस्तान की सेना पर बड़ा हमला किया। पहला हमला बलूचिस्तान की बोलन घाटी के शोरकंड इलाके में हुआ, जहां BLA ने रिमोट कंट्रोल बम से एक सैन्य वाहन को निशाना बनाया। इस हमले में गाड़ी में सवार सभी 12 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। यह वाहन एक सैन्य मिशन पर था, जिसकी अगुवाई स्पेशल ऑपरेशंस कमांडर तारिक इमरान कर रहे थे।
इस हमले में सूबेदार उमर फारूक की भी मौत हुई। बम धमाका इतना शक्तिशाली था कि वाहन के परखच्चे उड़ गए और घटनास्थल पर ही सैनिकों की मौत हो गई।
कुछ ही घंटों बाद बीएलए ने दूसरा हमला कच्छ जिले के कुलाग तिगरान क्षेत्र में किया। इस बार निशाना बना पाकिस्तान की सेना का बम निरोधक दस्ता। एक IED धमाके में इस यूनिट के दो जवान मारे गए। इस तरह केवल एक दिन में बीएलए के दो हमलों में पाकिस्तान के 14 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।
इन हमलों के बाद बीएलए के प्रवक्ता जियांद बलोच ने एक बयान जारी कर पाकिस्तान की सेना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना अब सैन्य संगठन नहीं रह गई है, बल्कि एक कारोबारी समूह में तब्दील हो चुकी है, जो केवल चीन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा में लगी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि बलूचिस्तान की जनता को हक दिलाने और स्वतंत्रता की दिशा में बीएलए का संघर्ष जारी रहेगा।





