दरअसल, भारत के सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि मामला आस्था से जुड़ा हुआ है, यदि मंदिर के लड्डुओं में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया है, तो यह किसी भी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसपर कोर्ट ने एसजी से पूछ लिया कि इस बात के क्या सबूत है कि मिलावटी घी का इस्तेमाल लड्डुओं को बनाने के लिए किया गया है। कोर्ट ने रोहतगी से पूछा कि जब मामले की जाँच एसआईटी कर रही है, तो मुख्यमंत्री को मीडिया में जाने की क्या जरूरत थी? तिरुपति मंदिर की तरफ़ से पेश हुए वक़ील सिदार्थ लूथरा ने कहा कि मंदिर बोर्ड की तरफ से भी मामले की जाँच जारी है। कोर्ट ने कहा कि सबूतों के आधार पर साफ़ है कि घी के खारिज नमूनों के आधार पर मिलावट होने की बात कही गयी है।
कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के.वी विश्वनाथन की पीठ ने की। मामले में कोर्ट में याचिका वरिष्ठ बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी, राज्यसभा सांसद और टीडीपी के पूर्व अध्यक्ष वाई वी सुब्बा रेड्डी और इतिहासकार विक्रम सम्पत और आध्यात्मिक प्रवचन देने वाले दुष्यंत श्रीधर ने तीन याचिकाएं दायर की थी।
कोर्ट में क्या कुछ हुआ
जस्टिस बीआर गवई ने राज्य सरकार से पूछा कि जब मिलावटी घी के इस्तेमाल को लेकर पहले से ही जाँच चल रही है, तो मीडिया में जाने की इतनी जल्दी क्या थी। सरकार को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की जरुरत थी। इसपर लूथरा ने कोर्ट से कहा कि कुछ भक्तों ने लड्डू के स्वाद में बदलाव होने की बात कही थी। जस्टिस गवई ने लूथरा से पूछा कि जिन लड्डुओं में स्वाद के बदलाव की बात कही जा रही है, क्या उसकी जाँच हुई। जस्टिस विश्वनाथन ने पूछा कि लड्डुओं में मिलावट को लेकर क्या दूसरी राय भी ली गयी थी। इस बात का कोई सबूत पेश नहीं किया गया है कि मिलावटी घी का इस्तेमाल हुआ है।
क्या है पूरा मामला
हाल ही में मुख्यमंत्री नायडू ने 17 जुलाई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, ऐलान के अंदाज़ में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी पर आरोप लगाया था कि उनके कार्यकाल में तिरुपति मंदिर की पवित्रता को खंडित किया गया । मुख्यमंत्री नायडू ने एक निजी लैब रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रेड्डी के कार्यकाल में मंदिर के लड्डुओं में पशुओं की चर्बी का इस्तेमाल हुआ था। मुख्यमंत्री नायडू के बयान के बाद दक्षिण से लेकर उत्तर भारत में राजनीतिक भूचाल आ गया था। हालाँकि, पूर्व मुख्यमंत्री रेड्डी ने आरोपों को निराधार बताया, और कहा कि जिस घी में मिलावट हुई थी, उसको वापस कर दिया गया था, और इस्तेमाल का तो सवाल ही नहीं उठता। पूर्व मुख्यमंत्री ने यहाँ तक कह दिया कि मुख्यमंत्री नायडू अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए झूठे आरोप लगाकर किसी भी स्तर तक गिर सकते है।





