इसके अलावा, उपायुक्त ने सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक पोस्ट करने, संदेश या वीडियो फारवर्ड करने, या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री प्रसारित करने के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत, इस प्रकार के गतिविधियों को रोकने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति या समूह इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 223 के तहत उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
साथ ही, फेसबुक और वॉट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर समूह एडमिन को भी अपनी जिम्मेदारी समझने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले संदेशों से बचने का निर्देश दिया गया है। एडमिन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके ग्रुप में इस प्रकार की सामग्री न भेजी जाए। यदि कोई सदस्य आपत्तिजनक संदेश भेजता है, तो एडमिन को तुरंत स्थानीय पुलिस थाने को सूचित करना होगा, अन्यथा उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
नैंसी सहाय ने यह भी कहा कि समाज में अफवाहों का फैलना एक गंभीर समस्या बन चुकी है, जो न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि लोगों को मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित भी करती है। इस समस्या से निपटने के लिए उपायुक्त ने सभी पत्रकारों, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों पर सांप्रदायिक समाचारों को प्रसारित करने से बचें और अफवाहों को फैलाने में अपना योगदान न दें।
उपायुक्त ने यह भी कहा कि यदि हम सभी मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि हमारी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स समाज के लिए जिम्मेदार और सकारात्मक भूमिका निभाएं, तो हम एक स्वस्थ और समृद्ध समाज की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रयास से हम हजारीबाग में एक मजबूत और शांति-प्रिय समुदाय बना सकेंगे।
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