अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक के खिलाफ है और इसे किसी भी हालत में मंजूरी नहीं दी जाएगी। उनके अनुसार, भाजपा ने पहले रेलवे की ज़मीन, फिर रक्षा की ज़मीन बेची, और अब वक्फ की ज़मीन बेचने का प्रस्ताव है, जो उनकी पार्टी और आम जनता के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने भाजपा के नेतृत्व को तीखे शब्दों में आलोचना करते हुए यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह बयान कि राजनीति उनका "अंशकालिक काम" है, दर्शाता है कि सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब नेता ही अंशकालिक काम करने का दावा करते हैं, तो दिल्ली के लोग ऐसे अंशकालिक नेताओं को क्यों नहीं हटा देते?
समाजवादी पार्टी के सांसद जावेद अली खान ने भी इस विधेयक पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और इसे अनुचित तरीके से एक विशेष धर्म के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि किसी भी विधेयक या संशोधन विधेयक को लाने का अधिकार सरकार का है, लेकिन यह विधेयक एक धर्म के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने के लिए लाया जा रहा है, जो कि संवैधानिक दृष्टिकोण से ठीक नहीं है।
उन्होंने भाजपा के सहयोगी दलों से आग्रह किया कि वे इस विधेयक का समर्थन करने से पहले इस पर पुनर्विचार करें। उनका कहना था कि विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों द्वारा इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है, और आशा है कि भाजपा के सहयोगी दल, जो अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को बनाए रखने का दावा करते हैं, इस संवेदनशील मसले पर सरकार का समर्थन नहीं करेंगे। उनका कहना था कि यह विधेयक धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों से समझौता कर सकता है, और यह भाजपा के सहयोगी दलों के दावों के खिलाफ जा सकता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार को किसी भी धार्मिक समुदाय के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए, ताकि समाज में आपसी सौहार्द और सहिष्णुता बनी रहे।
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उन्होंने भाजपा के सहयोगी दलों से आग्रह किया कि वे इस विधेयक का समर्थन करने से पहले इस पर पुनर्विचार करें। उनका कहना था कि विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों द्वारा इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है, और आशा है कि भाजपा के सहयोगी दल, जो अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को बनाए रखने का दावा करते हैं, इस संवेदनशील मसले पर सरकार का समर्थन नहीं करेंगे। उनका कहना था कि यह विधेयक धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों से समझौता कर सकता है, और यह भाजपा के सहयोगी दलों के दावों के खिलाफ जा सकता है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि सरकार को किसी भी धार्मिक समुदाय के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए, ताकि समाज में आपसी सौहार्द और सहिष्णुता बनी रहे।
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