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CBI की जांच पर दुर्गेश पाठक बोले – "AAP नेताओं को डराने की चाल"

पाठक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा यह साफ तौर पर आप नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की एक कोशिश है। मैं एजेंसियों का पूरा सहयोग करूंगा लेकिन डरूंगा नहीं।

CBI की जांच पर दुर्गेश पाठक बोले – "AAP नेताओं को डराने की चाल"
फोटो: CBI की जांच पर दुर्गेश पाठक बोले – "AAP नेताओं को डराने की चाल"
आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और गुजरात के सह-प्रभारी दुर्गेश पाठक ने गुरुवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीबीआई की छापेमारी एक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराना है। उन्होंने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे, लेकिन किसी भी दबाव में झुकेंगे नहीं। पाठक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यह साफ तौर पर आप नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने की एक कोशिश है। मैं एजेंसियों  का पूरा सहयोग करूंगा, लेकिन डरूंगा नहीं।"

"तीन घंटे तक घर की तलाशी, लेकिन कुछ नहीं मिला"


दुर्गेश पाठक ने बताया कि सीबीआई की एक टीम उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची, जहां उन्होंने लगभग तीन से चार घंटे तक गहन तलाशी ली। "उन्होंने दो कमरों वाले मेरे घर का कोना-कोना छान मारा। किताबों के पन्ने पलटे, दस्तावेज़ देखे, लेकिन कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला," उन्होंने कहा। पाठक ने यह भी बताया कि जाते समय सीबीआई टीम कुछ आगंतुकों के आधार कार्ड की फोटोकॉपी लेकर गई, जो विधायक रहते हुए उनसे काम के सिलसिले में मिलने आए थे।

दुर्गेश पाठक ने यह आरोप भी लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि उन्हें हाल ही में गुजरात का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। "पिछली बार AAP ने गुजरात में पांच सीटें जीती थीं। उसके बाद हमारे बड़े नेता — अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन और संजय सिंह — को निशाना बनाया गया, अब मेरी बारी है।

सीबीआई ने दुर्गेश पाठक और आप के एक अन्य पदाधिकारी कपिल भारद्वाज के खिलाफ विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), 2010 के उल्लंघन के आरोपों में जांच शुरू की है। यह अधिनियम 2020 में संशोधित किया गया था। आरोप है कि आम आदमी पार्टी और उसके कुछ पदाधिकारियों ने अवैध रूप से विदेशी चंदा प्राप्त किया। गृह मंत्रालय की अनुमति के आधार पर CBI अब इस मामले की औपचारिक जांच कर रही है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच शुरू कर दी है। ईडी ने अपने निष्कर्ष गृह मंत्रालय को सौंप दिए हैं, जिनके आधार पर कार्रवाई की जा रही है।