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"25,000 उम्मीदवार ही नहीं, उनके परिवार भी प्रभावित" – सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ममता बनर्जी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी असहमति जताते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस निर्णय को स्वीकार नहीं करतीं।

"25,000 उम्मीदवार ही नहीं, उनके परिवार भी प्रभावित" – सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ममता बनर्जी
फोटो: "25,000 उम्मीदवार ही नहीं, उनके परिवार भी प्रभावित" – सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ममता बनर्जी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में 25,000 शिक्षकों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया। इस फैसले को बरकरार रखते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर हेरफेर और धोखाधड़ी हुई थी, जिससे इसकी वैधता और विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो गई। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी असहमति जताते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से इस निर्णय को स्वीकार नहीं करतीं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न्यायालय के आदेश का सम्मान करेगी और नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) को निर्देशित कर दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने अपने फैसले में कहा, "यह मामला गंभीर अनियमितताओं का है। चयन प्रक्रिया इतनी दूषित हो चुकी है कि इसे किसी भी तरह से वैध नहीं ठहराया जा सकता।" कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें भर्ती प्रक्रिया को अमान्य घोषित किया गया था और चयनित उम्मीदवारों की सेवाएं समाप्त करने का निर्देश दिया गया था।

ममता बनर्जी ने जताई असहमति, उम्मीदवारों को दिया आश्वासन


एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा, "हमारे वकील इस फैसले की समीक्षा करेंगे। मैं जानती हूं कि उम्मीदवार बहुत निराश हैं। मैं 7 अप्रैल को नेताजी इंडोर स्टेडियम में उनसे मिलूंगी। मानवीय आधार पर मैं उनके साथ हूं। अगर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) मुझे इस फैसले के खिलाफ बोलने के लिए जेल भेजना चाहती है, तो भेज सकती है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी पश्चिम बंगाल को बार-बार निशाना बना रही है। उन्होंने कहा, "मैं बंगाल में पैदा हुई हूं और मुझे केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट रूप से समझ में आती है। पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री जेल में हैं, लेकिन एमपी के व्यापम घोटाले में कितने बीजेपी नेताओं को गिरफ्तार किया गया?"

क्या है शिक्षक भर्ती घोटाला?


यह घोटाला 2016 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जब राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कथित रूप से नकदी लेकर अवैध नियुक्तियां की गईं। 2016 में 25,000 शिक्षकों की भर्ती के लिए 23 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा दी थी। आरोप है कि कई उम्मीदवारों की ओएमआर शीट (उत्तर पुस्तिका) का गलत मूल्यांकन कर उन्हें नौकरी दी गई। इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसमें भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए। अप्रैल 2024 में हाईकोर्ट ने इस भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया और सीबीआई को मामले की जांच जारी रखने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह मामला भ्रष्टाचार और हेरफेर का है, जिसमें पारदर्शिता पूरी तरह समाप्त हो गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह ऐसी प्रक्रिया नहीं है जिसे सुधारकर वैध बनाया जा सके, इसलिए नियुक्तियों को रद्द करना ही एकमात्र समाधान था।

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