ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक कदम
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने इस पहल को ग्रामीण भारत और वहां की अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, "यह पहल गांवों में वर्षों से चली आ रही संपत्ति विवाद की समस्या को समाप्त करने और ग्रामीण विकास को गति देने में मदद करेगी। यह संभव हुआ है राज्य सरकारों, अधिकारियों और ग्राम पंचायतों के हजारों कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से।" प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में संपत्ति के अधिकार को एक बड़ी वैश्विक चुनौती करार दिया। उन्होंने कहा कि संपत्ति के कानूनी दस्तावेजों की अनुपलब्धता न केवल विवादों को बढ़ावा देती है, बल्कि गरीब और कमजोर वर्गों की जमीनों पर कब्जे जैसी समस्याएं भी पैदा करती है।
संपत्ति का अधिकार: गरीबी उन्मूलन की कुंजी
पीएम मोदी ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई थी कि कई देशों में संपत्ति के अधिकारों की कमी से गरीबी और असमानता बढ़ती है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने कहा, "हमारे गांवों में लोगों के पास लाखों-करोड़ों रुपये की संपत्ति है, लेकिन कानूनी दस्तावेजों के अभाव में वे इसे अपनी संपत्ति साबित नहीं कर पाते। इससे विवाद और अन्य समस्याएं जन्म लेती हैं।"
स्वामित्व योजना: क्या है और कैसे काम करती है?
स्वामित्व योजना की शुरुआत 24 अप्रैल, 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने की थी। यह योजना ग्रामीण भारत की आर्थिक प्रगति को तेज करने और भूमि विवादों को कम करने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसके तहत गांवों में जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से तैयार किया जाता है।
योजना के अंतर्गत अब तक 3.17 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 92% है। इस प्रक्रिया के तहत 1.53 लाख गांवों के लिए लगभग 2.25 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं।
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