कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्तक्षेप पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “यह हैरानी की बात है कि हमारी संप्रभुता पर चर्चा एक विदेशी नेता के माध्यम से हो रही है। अगर युद्धविराम की कोई पहल थी, तो इसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करनी चाहिए थी, न कि किसी तीसरे पक्ष को।” उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और इसमें बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा, “कांग्रेस यह जानना चाहती है कि क्या भारत की विदेश नीति में कोई मौलिक बदलाव आया है, जिसके तहत अमेरिका की मध्यस्थता को स्वीकार किया गया है?” उन्होंने आगे कहा कि इस विषय पर स्पष्टता लाने के लिए सरकार को संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने आशंका जताई कि क्या सरकार ने 1972 के शिमला समझौते का उल्लंघन किया है, जिसमें भारत और पाकिस्तान ने यह तय किया था कि कश्मीर जैसे मुद्दे को किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के बिना द्विपक्षीय रूप से सुलझाया जाएगा। वेणुगोपाल ने कहा, “जब अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार हस्तक्षेप का दावा कर रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि भारत सरकार की मौन स्वीकृति है या नहीं।” कांग्रेस ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मौजूदा हालात में विपक्ष, केंद्र सरकार और भारतीय सेना के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। वेणुगोपाल ने कहा, “यह समय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं है, लेकिन यह भी जरूरी है कि हम राष्ट्रीय हितों पर कोई चूक न करें।” उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह संसद का विशेष सत्र बुलाकर हालात की पूरी जानकारी दे और आगे की रणनीति पर चर्चा करे।





