विज ने इन तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान तायल के साथ जो कार्यकर्ता नजर आ रहे थे, वही कार्यकर्ता बीजेपी की विरोधी उम्मीदवार चित्रा सरवारा के साथ भी दिखाई दे रहे थे। विज ने लिखा, "यह रिश्ता क्या कहलाता है?" और तस्वीरों के नीचे 'गद्दार-गद्दार-गद्दार' शब्द जोड़कर यह सवाल उठाया कि ऐसे समय में जब पार्टी को एकजुटता की जरूरत है, क्या इन नेताओं का यह संबंध पार्टी के हित में है?
विज का यह आरोप भी था कि यदि तायल सैनी के बहुत करीबी मित्र हैं, तो बीजेपी उम्मीदवार की मुखालफत करने के पीछे कौन था? उन्होंने सीधे तौर पर सैनी पर निशाना साधते हुए यह सवाल उठाया कि बीजेपी में घटी यह घटनाएं पार्टी के लिए नुकसानदायक हैं। अनिल विज ने अपनी पोस्ट में कहा, "आशीष तायल अभी भी सैनी के परम मित्र बने हुए हैं, तो फिर बीजेपी के उम्मीदवार के खिलाफ मुखालफत की जिम्मेदारी किसने ली?"
विज की नाराजगी केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित नहीं रही है। पिछले कुछ दिनों से वह सैनी के खिलाफ कई सार्वजनिक बयानों के जरिए अपनी असहमति जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में उन्हें दरकिनार किया जा रहा है और उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। विज ने तो यह तक कह दिया कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो वह किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की तरह आमरण अनशन पर भी बैठ सकते हैं। विज ने यह आरोप भी लगाया कि सैनी के मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनका व्यवहार बदल गया है और वे अब जनता के दुःख-दर्द के बजाय अपने निजी हितों की ओर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
विज ने अपने बयान में यह भी कहा कि सैनी की सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी उनके पास है, लेकिन उन्होंने इस दौरान कई फैसले लिए हैं, जिनसे पार्टी और जनता में असंतोष पैदा हुआ है। उदाहरण के तौर पर, हाल ही में विज ने एक पुलिस अधिकारी को निलंबित करने का आदेश दिया था, लेकिन उनकी ओर से दिए गए आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उनकी स्थिति और भी कमजोर हुई।
इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अनिल विज को सैनी के सत्ता में आने के बाद अपने प्रभाव में कमी महसूस हो रही है, और शायद यही कारण है कि वह इस प्रकार से सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि यदि इस विवाद को शीघ्र सुलझाया नहीं गया, तो राज्य में बीजेपी के भीतर और भी बड़े राजनीतिक संकट पैदा हो सकते हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर अनिल विज और नायब सिंह सैनी के बीच यह विवाद गहरा गया तो पार्टी में खींचतान और आंतरिक टकराव और बढ़ सकते हैं, जो न केवल राज्य में बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी असर डाल सकता है।





