मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि "जब भी बसपा ने कांग्रेस जैसी जातिवादी पार्टियों के साथ चुनाव लड़ा, तब हमारा मूल वोट कांग्रेस को ट्रांसफर हुआ, लेकिन कांग्रेस अपना वोट बसपा को नहीं दिला सकी। इससे बसपा को हमेशा नुकसान हुआ है।" उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की विचारधारा, आरक्षण नीति और दलित-बहुजन समाज के खिलाफ रही हैं।
राहुल गांधी ने बसपा की भूमिका पर उठाए थे सवाल
मायावती की यह प्रतिक्रिया राहुल गांधी के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने बसपा पर 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा विरोधी मोर्चे से दूरी बनाए रखने का आरोप लगाया था। रायबरेली में दलित छात्रों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, "मैं चाहता था कि बहनजी (मायावती) हमारे साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ लड़ें, लेकिन किसी कारण से उन्होंने ऐसा नहीं किया। यह बेहद निराशाजनक था। अगर बसपा, सपा और कांग्रेस एक साथ आ जाते, तो भाजपा कभी नहीं जीत पाती।"
राहुल गांधी ने इस दौरान बसपा संस्थापक कांशीराम की भी सराहना की और कहा कि उन्होंने दलित राजनीति की मजबूत नींव रखी थी, जिसे मायावती ने आगे बढ़ाया। हालांकि, उन्होंने वर्तमान समय में बसपा की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए उसके भाजपा से दूरी बनाए रखने के निर्णय को लेकर आलोचना की।
उत्तर प्रदेश में 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा और 43 सीटों पर जीत हासिल की। इससे भाजपा की स्थिति कुछ कमजोर जरूर हुई, लेकिन बसपा की निष्क्रियता पर सवाल उठे। मायावती के इस तीखे जवाब के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि बसपा आगे की राजनीति में क्या रुख अपनाती है और क्या वह भविष्य में किसी गठबंधन का हिस्सा बनती है या नहीं।
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