कंडक्टर ने इस हमले के बाद अपनी आंखों में आंसू लिए हुए पुलिस को जानकारी दी और बताया कि उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। घटना के बाद कंडक्टर को बेलगावी आयुर्विज्ञान संस्थान (बीआईएमएस) में भर्ती कराया गया। हालांकि, चिकित्सकों ने बताया कि कंडक्टर को मामूली चोटें आई हैं और उसकी हालत स्थिर है।
घटना के बाद कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं ने बेलगावी शहर में विरोध प्रदर्शन किया। इन कार्यकर्ताओं का कहना था कि कन्नड़ भाषा का अपमान करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। विरोध प्रदर्शन में कन्नड़ भाषा और संस्कृति के संरक्षण की बात की गई।
पुलिस ने घटना में शामिल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान मारुति तुरुमुरी, राहुल नायडू और बालू गोजागेकर के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन आरोपियों को जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा।
डीसीपी रोहन जगदीश ने घटना की जांच के लिए बेलगावी के बीआईएमएस अस्पताल का दौरा किया और कंडक्टर की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
बेलगावी में मराठी भाषी समुदाय काफी बड़ा है और कई लोग जिले के महाराष्ट्र में विलय की मांग कर रहे हैं, जबकि कन्नड़ भाषी लोग इसका विरोध कर रहे हैं। यह स्थिति कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच लंबे समय से चली आ रही विवादों का हिस्सा है। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भाषाई भेदभाव के खिलाफ दिए गए बयान के ठीक बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने भारतीय भाषाओं के बीच समरसता और सहयोग की बात की थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कहा था कि भारतीय भाषाओं के बीच कभी कोई वैर नहीं रहा और सभी भाषाओं ने एक-दूसरे को समृद्ध किया है। उन्होंने मराठी भाषा की शूरता, वीरता, सौंदर्य, संवेदनशीलता और समानता को विशेष रूप से उल्लेख किया। इस प्रकार, इस घटना ने भाषाई विवादों को फिर से हवा दी है और कर्नाटक सरकार को इस मुद्दे पर संवेदनशीलता से काम करने की आवश्यकता का संकेत दिया है।
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