दीपक तंवर ने खुद को दिल्ली भाजपा का नेता बताते हुए अपने राजनीतिक सफर की जानकारी दी है। इसके साथ ही, वह बॉलीवुड में एक फिल्म निर्माता भी रह चुके हैं। चिराग पासवान ने दीपक तंवर के बारे में कहा, "हमने देवली सीट से एक ऐसे उम्मीदवार को चुना है जिन्होंने वर्षों तक बिना किसी स्वार्थ के अपने क्षेत्र के लोगों के बीच काम किया है। दीपक तंवर मेरे परिवार और मेरे विचारों के साथ दशकों से जुड़े हुए हैं, और मुझे पूरा विश्वास है कि वह इस चुनाव में जीत हासिल करेंगे।"
दिलचस्प बात यह है कि एनडीए ने दिल्ली की 70 सीटों में से सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। भाजपा ने 68 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि एक सीट जेडीयू को दी गई है। लोजपा के सिंबल पर दीपक तंवर चुनाव लड़ने जा रहे हैं। पार्टी ने यह निर्णय दिल्ली में भाजपा के सहयोगी दलों को टिकट देने का और इन सीटों पर मुकाबला करने का मौका देने का किया है, खासकर जब दिल्ली में पूर्वांचली वोटर्स की बड़ी आबादी है।
दिल्ली में भाजपा ने जहां एनडीए के दो सहयोगी दलों को साथ लिया है, वहीं कांग्रेस इस चुनाव में अकेले मैदान में उतरने का फैसला किया है। कांग्रेस ने इस बार किसी भी गठबंधन का हिस्सा बनने का इरादा नहीं दिखाया, और अपने दम पर चुनावी संघर्ष करने का निर्णय लिया है।
वहीं, राजद ने कांग्रेस से कुछ सीटें मांगने का प्रयास किया था, लेकिन यह बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई।
दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी अपने रुख को स्पष्ट किया है और इस बार अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पिछली बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने एक साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अकेले ही मैदान में उतरने का फैसला किया है।
इस प्रकार, दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा और उसके सहयोगी दल एनडीए के तहत गठबंधन में चुनावी मैदान में हैं, वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों अपने-अपने दम पर चुनावी संघर्ष में जुटे हुए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि किस पार्टी को दिल्ली की जनता कितना समर्थन देती है।
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