गुरपतवंत सिंह पन्नू, जो खालिस्तानी आंदोलन का एक प्रमुख समर्थक और आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का प्रमुख है, ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में कथित रूप से शामिल हुआ था। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है, क्योंकि पन्नू जैसे व्यक्ति का किसी आधिकारिक अमेरिकी कार्यक्रम में उपस्थित होना भारत के लिए एक गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस संदर्भ में कहा, "हम जब भी भारत विरोधी गतिविधियों का सामना करते हैं, तो हम इसे अमेरिकी सरकार के सामने रखते हैं और इसे गंभीरता से उठाते हैं। यह हमारी स्थायी नीति है, और हम इसे जारी रखेंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर उस गतिविधि को नकारे, जो भारत के खिलाफ हो सकती है, विशेष रूप से जब यह राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हो। "
भारत का मानना है कि अगर कोई शख्स या समूह जो भारत की संप्रभुता या उसकी अखंडता को चुनौती देता है, किसी महत्वपूर्ण अमेरिकी घटना या समारोह में शामिल होता है, तो यह दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक नकारात्मक संकेत हो सकता है।"
इसके अतिरिक्त, भारत ने अमेरिका से यह उम्मीद जताई है कि वह ऐसे मामलों में एक दृढ़ और स्पष्ट रुख अपनाएगा, ताकि दोनों देशों के बीच मजबूत और सकारात्मक संबंध बनाए रह सकें।
जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की विदेश नीति यह सुनिश्चित करने के लिए है कि कोई भी गतिविधि, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हो, उसे नजरअंदाज न किया जाए और उसे उचित मंच पर उठाया जाए।
भारत और अमेरिका के रिश्तों में सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई एक अहम पहलू रही है, और भारत इस उम्मीद के साथ अमेरिकी प्रशासन से इस मामले में ठोस कदम उठाने की उम्मीद करता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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