इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के तौर पर शामिल होना मेरे लिए गर्व की बात है।" इस पोस्ट के जरिए उन्होंने समारोह की महत्ता को उजागर किया और भारत-अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने में अपने योगदान का जिक्र किया।
इस मौके पर एस. जयशंकर ने ट्रंप प्रशासन के कई मंत्रियों और अधिकारियों से मुलाकात की। इसके अलावा, उन्होंने क्वाड देशों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में भी हिस्सा लिया, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद थे। यह मुलाकात अमेरिका और भारत के बीच सुरक्षा, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंध रहे हैं, और माना जा रहा है कि ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर फिर से काबिज होने के बाद दोनों देशों के रिश्ते और भी मजबूत होंगे। ट्रंप का रुख आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी सख्त रहा है, और भारत भी इस वैश्विक समस्या से समान रूप से प्रभावित है। इसलिए, एस. जयशंकर का इस शपथ समारोह में उपस्थित होना भारत के लिए एक खास अवसर था, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते रिश्तों की ओर इशारा करता है।
डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी, साथ ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा, बिल क्लिंटन और जॉर्ज बुश भी शामिल हुए। इन पूर्व राष्ट्रपतियों के अलावा, मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग, अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस जैसे प्रमुख कारोबारी भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और इस ऐतिहासिक घटना का गवाह बने। एलन मस्क, जो अपनी उपस्थिति से हमेशा ध्यान आकर्षित करते हैं, इस बार भी इस आयोजन का आकर्षण बने रहे और समारोह के दौरान उत्साहित नजर आए।
ट्रंप ने अपनी सत्ता संभालते ही अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए मेक्सिको से लगती सीमा पर बॉर्डर इमरजेंसी घोषित की।
इसके साथ ही, उन्होंने मेक्सिको की सीमा पर दीवार बनाने की योजना को फिर से लागू करने की बात की, जो उनके पहले कार्यकाल में भी एक प्रमुख मुद्दा था। इसके अलावा, ट्रंप ने ड्रग तस्करों को आतंकवादी घोषित करने का भी फैसला लिया, जिससे उनकी सरकार का सख्त रुख और सुरक्षा नीति और स्पष्ट हो गई। इस कदम से यह साफ हो गया कि ट्रंप अमेरिका की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए देश की आंतरिक और बाहरी खतरों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
ट्रंप का यह "अमेरिका फर्स्ट" का संदेश फिर से मजबूत हो गया है, जो उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यापार और विदेशी नीति के प्रमुख स्तंभों में से एक होगा। यह साफ है कि उनका प्रशासन अब भी अमेरिका के सर्वोत्तम हितों को प्राथमिकता देने के लिए प्रतिबद्ध है, और इस दिशा में भारत भी एक अहम साझेदार बना रहेगा।
Read This Also:- डोनाल्ड ट्रंप ने WHO से अमेरिका को हटाने का लिया फैसला, चीन पर लगाए गंभीर आरोप
Read This Also:- डोनाल्ड ट्रंप ने WHO से अमेरिका को हटाने का लिया फैसला, चीन पर लगाए गंभीर आरोप





