पॉडकास्ट इंटरव्यू में गौरव वल्लभ ने कांग्रेस के आंतरिक मामलों और अपनी पार्टी छोड़ने के फैसले पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कांग्रेस में ‘पीए कल्चर’ के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और पार्टी में परिवारवाद और भेदभाव की समस्या को गंभीर तरीके से उठाया। गौरव ने कहा, “कांग्रेस में मुझे एक व्यक्ति के बारे में पता है जो खरगे साहब के काफी करीबी हैं। उसकी सबसे बड़ी योग्यता यह है कि उसे दिल्ली में मटन कहां अच्छा मिलता है। खरगे साहब मटन के शौकिन हैं, और यह व्यक्ति जानता है कि पुरानी दिल्ली में कौन सी दुकान पर मटन सबसे अच्छा मिलता है। उसी के कारण वह व्यक्ति मटन लाते-लाते दूसरी बार राज्यसभा पहुंच गया। उस व्यक्ति में न तो कोई समझदारी है, न ही वह ज्ञान से भरा हुआ है, उसकी केवल एक योग्यता है, वह मटन लाने की।” गौरव वल्लभ ने स्पष्ट किया कि वह किसी के खाने-पीने से कोई आपत्ति नहीं रखते, लेकिन कांग्रेस पार्टी में राज्यसभा जाने के लिए मटन लाने को योग्यता नहीं मानते।
जब आदेश रावल ने इस संदर्भ में जम्मू-कश्मीर के प्रभारी नासिर हुसैन का नाम लिया, तो गौरव वल्लभ ने तुरंत कहा, "मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन कांग्रेस पार्टी के हर कार्यकर्ता को यह पता है कि मटन लाने की योग्यता किसके पास है।"
इसके बाद गौरव वल्लभ ने कांग्रेस के भीतर हो रही चाटुकारिता और बेबुनियाद पदों पर बैठने की प्रक्रिया को और भी आलोचनात्मक तरीके से उजागर किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के घटनाक्रम पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं और उसे सुधारने की आवश्यकता है।
गौरव वल्लभ की यह टिप्पणी कांग्रेस में चल रही अंदरूनी राजनीति और कार्यशैली को लेकर न सिर्फ सवाल उठाती है, बल्कि पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की कमजोरी को भी उजागर करती है। उनके आरोपों से पार्टी के भीतर चल रहे परिवारवाद, भेदभाव और योग्यता से ज्यादा निजी संबंधों के आधार पर पदों का चयन करने की संस्कृति पर बहस छिड़ गई है।
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