इफ्तार पार्टी पर क्या बोले चिराग पासवान?
इफ्तार आयोजन को लेकर जब पासवान से सवाल किया गया तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा,
"मैं हिंदू हूं, फिर भी मैं इफ्तार पार्टी आयोजित कर रहा हूं, क्योंकि जब हिंदू और मुसलमान साथ बैठकर रोटी खाते हैं, तो इससे समाज में भाईचारे और सौहार्द का संदेश जाता है। लेकिन यदि कोई धार्मिक संगठन या उसका नेता ऐसे आयोजनों पर राजनीति करता है, तो यह इफ्तार की पवित्रता के खिलाफ है।"
पासवान से जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया मांगी गई, जिसमें उन्होंने एनडीए नेताओं द्वारा आयोजित इफ्तार और ईद मिलन कार्यक्रमों से दूरी बनाने की बात कही थी। इस पर चिराग ने कहा,
"मदनी साहब बुजुर्ग हैं और मेरे परिवार के साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं, लेकिन मेरी भी उनसे एक छोटी शिकायत है। मेरे पिता रामविलास पासवान ने 2005 में मुस्लिम मुख्यमंत्री की मांग को लेकर अपनी पार्टी को समाप्त कर दिया था। लेकिन आज उनके बेटे से आपको शिकायत है, जबकि जिन पार्टियों ने मुसलमानों को दशकों तक केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, उनसे आपको कोई शिकायत नहीं है?"
"कांग्रेस और राजद ने मुसलमानों को किया गुमराह"
चिराग पासवान ने कांग्रेस और राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि इन दलों ने मुसलमानों के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। उन्होंने सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा,
"यह रिपोर्ट खुद बताती है कि देश में मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति कितनी खराब है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार को छोड़ दें तो अधिकतर समय देश में कांग्रेस की ही सरकार रही। इसी तरह, 2005 तक बिहार में राजद सत्ता में था।"
उन्होंने कहा कि यदि मुसलमानों की हालत खराब है तो इसके लिए वही पार्टियां जिम्मेदार हैं, जिन्होंने दशकों तक शासन किया।
"मदनी साहब इफ्तार का बहिष्कार करने का फैसला ले सकते हैं, यह उनका अधिकार है। लेकिन कांग्रेस और राजद को संरक्षण देना सही नहीं है, क्योंकि इन्हीं पार्टियों ने मुसलमानों को वोट बैंक समझा और उनकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार हैं।"
बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव होने हैं, और इफ्तार पार्टियों को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। 24 मार्च को बिहार में विभिन्न दलों ने इफ्तार पार्टियों का आयोजन किया। चिराग पासवान की इफ्तार पार्टी में कई बड़े राजनीतिक चेहरे शामिल हुए, जिससे इसे विशेष राजनीतिक महत्व मिल गया।
नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी समेत एनडीए के कई नेताओं की मौजूदगी ने राजनीतिक समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। वहीं, कुछ मुस्लिम नेताओं ने चिराग पासवान की इफ्तार पार्टी से दूरी बनाए रखी, जिससे इस आयोजन को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं।
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