वर्मा से जब यह सवाल किया गया कि उनका बैकग्राउंड आरएसएस से जुड़ा है, तो राहुल गांधी को क्यों उम्मीद थी कि वह पार्टी बदलने पर विचार करेंगे, तो इस पर वर्मा ने बताया, "हमारे घर और राहुल गांधी के घर के बीच बहुत नजदीकी थी। अक्सर शाम के वक्त हम खाना खाकर बाहर टहलते थे और इस दौरान मुलाकात होती थी। शायद राहुल गांधी को लगा कि उन्हें मुझे अपनी पार्टी में शामिल कर लिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"
वर्मा ने आरएसएस के महत्व को लेकर भी कुछ अहम बातें साझा की। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या आरएसएस इस बार उनकी सीट पर प्रचार कर रहा है, तो वर्मा ने कहा, "सच यह है कि भाजपा ने कभी भी बिना आरएसएस की मदद के कोई चुनाव नहीं जीता। यदि भाजपा आज भी सफल हो रही है तो उसका एक बड़ा कारण यह है कि आरएसएस पार्टी के साथ खड़ा होता है।" उनका यह बयान काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में यह दावा किया था कि अब पार्टी को आरएसएस की मदद की कोई आवश्यकता नहीं है।
नड्डा के इस बयान पर विवाद भी खड़ा हुआ था और संघ के अंदर भी इसकी आलोचना हुई थी।
नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर वर्मा ने स्पष्ट किया कि वह दिल्ली के ही बेटे हैं। उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली में पैदा हुआ हूं, यही पढ़ा-लिखा हूं और यहीं लोगों की सेवा की है। मैं अरविंद केजरीवाल की तरह दिल्ली का 'दामाद' नहीं हूं, जो यहां की जनता को धोखा दे रहा है और सब कुछ लूटकर खा रहा है।" पश्चिम दिल्ली से होने के बावजूद नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ने को लेकर वर्मा ने कहा कि यह पार्टी नेतृत्व का फैसला था और उन्होंने हमेशा पार्टी के आदेशों का पालन किया है। "हम पार्टी के आदेशों के मुताबिक ही कार्य करते हैं। पार्टी नेतृत्व जो कहता है, हम वही करते हैं, चाहे हमें किसी भी सीट से चुनाव लड़ने के लिए कहा जाए," वर्मा ने कहा।
पार्टी द्वारा पैसे बांटने के आरोप पर वर्मा ने अपनी सफाई दी और कहा, "मैं पैसे बांट रहा हूं, लेकिन लूट नहीं रहा हूं। मैंने वोटर कार्ड देखकर ही पैसे बांटे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को किसी भी प्रकार का लाभ न मिले।" वर्मा ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों के आधार कार्ड बनवाए हैं और उनके सभी दस्तावेज तैयार कराए हैं। उनका यह बयान दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (NRC) पर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण हो सकता है।
इन बयानों के माध्यम से वर्मा ने न सिर्फ अपनी पार्टी के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया, बल्कि दिल्ली में हो रहे चुनावी दांव-पेंच और अंदरूनी संघर्षों को भी उजागर किया। उनके आरोप और बयान विधानसभा चुनावों में राजनीतिक माहौल को और भी गर्म कर सकते हैं, खासकर उन मुद्दों पर जो दिल्ली में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, जैसे कि नागरिकता का मुद्दा, आरएसएस का प्रभाव, और अन्य राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा।
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