सचदेवा ने कहा, "संजय सिंह अपनी गलती स्वीकार नहीं करते और अब गुर्रा रहे हैं। जमानत पर छूटा व्यक्ति किस प्रकार दूसरों को आरोपित कर सकता है? उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी और उनके नेताओं ने दिल्ली के विकास में अनावश्यक हस्तक्षेप किया और इसे बर्बाद करने की साजिश की है। उन्होंने कहा कि संजय सिंह ने 2018 के हलफनामे में खुद को हरि नगर विधानसभा का वोटर बताया था, जबकि उनके नाम का उल्लेख सुल्तानपुर (यूपी) नगर पालिका परिषद की वोटर लिस्ट में भी था। इससे यह साबित होता है कि इनकी पूरी राजनीति में धोखा और छल का तत्त्व है।
इसके अलावा, सचदेवा ने आरोप लगाया कि संजय सिंह ने दिल्ली विधानसभा में अपना वोट बनाने के लिए फर्जी तरीके से वोटर लिस्ट में नाम डलवाया और तिलक नगर में भी अपना वोट बनवाया। उनका कहना था कि यह सब दिखाता है कि आम आदमी पार्टी का पूरा ढांचा फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है।
सचदेवा के आरोपों पर पलटवार करते हुए संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि "सुल्तानपुर की मतदाता सूची में न तो मेरा और न ही मेरी पत्नी का नाम है। मेरी पत्नी ने 4 जनवरी को अपना नाम हटाने के लिए सुल्तानपुर जिला निर्वाचन कार्यालय में आवेदन दिया है। केवल मेरे माता-पिता का नाम वहां है, इसके अलावा किसी अन्य का नाम नहीं है।"
संजय सिंह ने आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि उनके खिलाफ किए गए सभी आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आगे कहा कि यह पूरी राजनीति भाजपा द्वारा की जा रही साजिश का हिस्सा है, जिसमें वे आम आदमी पार्टी को नीचा दिखाने के लिए झूठे आरोपों का सहारा ले रहे हैं। संजय सिंह ने यह भी कहा कि उनका पूरा जीवन ईमानदारी और सच्चाई पर आधारित है और इस प्रकार के आरोप उन्हें डिगा नहीं सकते।





