तेजस्वी यादव बोले- संविधान खतरे में, वोट के अधिकार पर हमला
आरजेडी नेता ने विधानसभा में तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया गरीबों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, "एसआईआर में आधार या पैन कार्ड जैसी सामान्य पहचान नहीं, बल्कि ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो आम गरीबों के पास नहीं होते। करोड़ों प्रवासी बिहारी मजदूर हैं, जिन्हें फॉर्म भरने में परेशानी हो रही है। ऑनलाइन प्रक्रिया असुविधाजनक है।" तेजस्वी ने आगे कहा कि वोट देने का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिया गया संविधान आज खतरे में है। मतदाता सूची से नाम काटकर गरीबों से उनका लोकतांत्रिक अधिकार छीना जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग ने कहीं यह नहीं कहा है कि एसआईआर के दौरान घुसपैठिए पाए गए, फिर भाजपा और एनडीए के नेता ऐसे दावे क्यों कर रहे हैं?
सदन की कार्यवाही से पहले महागठबंधन के विधायकों ने विधानसभा परिसर में काला कुर्ता पहनकर विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में एसआईआर विरोधी बैनर और पोस्टर थे। प्रदर्शनकारियों ने "एसआईआर वापस लो", "एनडीए सरकार हटाओ" और "वोटबंदी नहीं चलेगी" जैसे नारे लगाए। विपक्षी दलों ने मांग की कि विधानसभा में एसआईआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया जाए।
SIR पर नीतीश-तेजस्वी में तीखी बहस
बुधवार को भी विधानसभा में इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "SIR की प्रक्रिया पिछली बार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में हुई थी और तब इसे पूरा करने में दो साल लगे थे। अब फिर से यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है, तो क्या मान लिया जाए कि 2003 से 2025 तक के चुनाव फर्जी तरीके से कराए गए? इसका मतलब तो यह हुआ कि नीतीश कुमार खुद फर्जी तरीके से मुख्यमंत्री बने और विधायक भी फर्जी वोटरों से निर्वाचित हुए हैं।"





