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Bihar Polls: 'चार दशक की राजनीति के बाद लालू यादव को पलायन की याद क्यों?', प्रशांत किशोर का तंज

प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू यादव ने 40 साल तक राजनीति की, इतने वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद अब जाकर उन्हें याद आ रहा है कि बिहार में पलायन को रोका जा |

Bihar Polls: 'चार दशक की राजनीति के बाद लालू यादव को पलायन की याद क्यों?', प्रशांत किशोर का तंज
फोटो: Bihar Assembly Election, Prashant Kishore
जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने बिहार में पलायन रोकने के लालू प्रसाद यादव के बयान पर तीखा पलटवार किया है। प्रशांत किशोर ने कहा कि लालू यादव ने 40 साल तक राजनीति की, इतने वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद अब जाकर उन्हें याद आ रहा है कि बिहार में पलायन को रोका जा सकता है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि लालू यादव ने केवल यह घोषणा की कि उनकी सरकार बनने के बाद पलायन रोका जाएगा, लेकिन यह नहीं बताया कि इसे रोकने के लिए वे क्या ठोस कदम उठाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद लालू यादव और उनकी पार्टी ने इस दिशा में कोई ठोस नीति क्यों नहीं बनाई?

जन सुराज का विस्तृत प्लान


प्रशांत किशोर ने अपने बयान में पलायन रोकने के लिए जन सुराज की स्पष्ट नीति को सामने रखा और बताया कि उनकी पार्टी केवल खोखले वादे नहीं करती, बल्कि हर वादे के पीछे ठोस तर्क और रणनीति होती है। उन्होंने कहा कि जन सुराज के पांच प्रमुख वादों पर पहले से गहन अध्ययन किया गया है और ये केवल चुनावी जुमले नहीं हैं, बल्कि व्यवहारिक रूप से लागू किए जा सकने वाले ठोस प्रस्ताव हैं।

प्रशांत किशोर ने विस्तार से बताया कि बिहार से होने वाले पलायन का मूल कारण पूंजी, बुद्धि और श्रम का बहिर्गमन है। उन्होंने कहा कि जब तक बिहार से पूंजी का पलायन नहीं रुकेगा, तब तक बुद्धिजीवियों और श्रमिकों का पलायन भी नहीं रोका जा सकता। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिहार के बैंकों से करोड़ों रुपये की पूंजी हर साल दूसरे राज्यों में निवेश के लिए चली जाती है, क्योंकि बिहार में उद्योग-धंधों का अभाव है। अगर इस पूंजी को बिहार में ही निवेश के लिए रोका जाए और नए उद्योग स्थापित किए जाएं, तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और वे अपने राज्य में ही रहना पसंद करेंगे।

बिहार के लिए सबसे खुशी का दिन


प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के लिए सबसे बड़ा खुशी का दिन तब होगा, जब यहां के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि जब पूंजी का पलायन रुकेगा, तो स्वाभाविक रूप से बुद्धिजीवियों का पलायन भी थमेगा, और फिर श्रमिकों का बाहर जाना भी धीरे-धीरे कम हो जाएगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक कल्पना नहीं है, बल्कि पूरी तरह से व्यावहारिक योजना है, जिसे सही नीति और इच्छाशक्ति के साथ लागू किया जा सकता है।

प्रशांत किशोर ने अन्य राजनीतिक दलों पर तंज कसते हुए कहा कि जन सुराज उन पार्टियों की तरह नहीं है, जो चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे तो करती हैं, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल जाती हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज जनता से वही वादा करेगा, जिसे सौ प्रतिशत पूरा कर सके। प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी किसी भी वादे को करने से पहले उस पर गहराई से अध्ययन करती है और यह सुनिश्चित करती है कि वह व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सके। उन्होंने कहा कि जन सुराज की राजनीति सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि बिहार को एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए है।

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