चीफ फायर ऑफिसर प्रमोद कुमार शर्मा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें सेक्टर 22 में आग लगने की सूचना मिली थी। जब दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, तो पाया कि आग करीब 15 टेंटों में फैल चुकी थी। राहत की बात यह रही कि आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया और इस हादसे में किसी भी व्यक्ति की जान नहीं गई। हालांकि, आग लगने के कारण का अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट को आग लगने का कारण माना जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस क्षेत्र में कोई एक्सेस रोड नहीं था, जिसके कारण दमकल गाड़ियों को वहां पहुंचने में थोड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा।
हालांकि, समय रहते आग पर काबू पा लिया गया और वहां किसी भी व्यक्ति को जलने की चोटें नहीं आईं। यह हादसा अस्थाई टेंटों में हुआ था, और यह क्षेत्र चमनगंज चौकी के अंतर्गत आता है। अधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
यह घटना खासतौर पर ध्यान आकर्षित करती है, क्योंकि इससे पहले 19 जनवरी को गोरखपुर के गीता प्रेस शिविर में भी आग लगने की घटना सामने आई थी। उस हादसे में डेढ़ सौ से ज्यादा कॉटेज जलकर खाक हो गए थे, और प्रशासन ने छोटे सिलेंडर में रिसाव को आग का कारण बताया था।
हालांकि, गीता प्रेस के अधिकारियों ने इसे बाहरी आग का परिणाम बताया था।
इसी प्रकार, महाकुंभ के दौरान 31 जनवरी को भी एक बड़ा हादसा हुआ था। मौनी अमावस्या के दिन संगम में भारी भगदड़ मचने के कारण 30 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 60 लोग घायल हो गए थे। प्रशासन के मुताबिक, यह हादसा बैरिकेडिंग टूटने और भीड़ के बढ़ने के कारण हुआ, जिसके चलते संगम के किनारे लेटे हुए लोग भी हादसे का शिकार हो गए। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि बड़ी धार्मिक सभाओं के दौरान उचित व्यवस्था की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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