बेंगलुरु के बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता
इस बजट में बेंगलुरु के विकास और यातायात समस्या के समाधान को विशेष रूप से प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि शहर को दिए जाने वाले वार्षिक 3,000 करोड़ रुपये के अनुदान को बढ़ाकर 7,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस राशि का उपयोग बेंगलुरु की आधारभूत संरचना को सुधारने के लिए किया जाएगा, जिसमें यातायात की भीड़ को कम करने के लिए कई योजनाएं शामिल हैं।
योजनाओं के तहत 40,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम गलियारों के निर्माण की योजना बनाई गई है, जिसके लिए बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) को 19,000 करोड़ रुपये की राशि की गारंटी दी गई है।
इसके अलावा, नम्मा मेट्रो के तीसरे चरण के साथ-साथ 8,916 करोड़ रुपये की लागत से 40.5 किलोमीटर लंबा डबल डेकर फ्लाईओवर बनाया जाएगा। शहर की सड़कों के विस्तार के लिए नहर बफर जोन का उपयोग करते हुए 3,000 करोड़ रुपये की लागत से 300 किलोमीटर अतिरिक्त सड़कें बनाई जाएंगी।
इसके अलावा, BBMP क्षेत्र में 660 करोड़ रुपये की लागत से 460 किलोमीटर लंबी धमनी और उप-धमनी सड़कों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। "ब्रांड बेंगलुरु" योजना को और सशक्त बनाने के लिए 1,800 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिसमें 21 योजनाओं को लागू किया जाएगा। इसी योजना के तहत अगले तीन वर्षों में 413 करोड़ रुपये की लागत से "व्यापक स्वास्थ्य कार्यक्रम" लागू किया जाएगा, जिससे बेंगलुरु को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों वाला शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए विशेष प्रावधान
बजट में अल्पसंख्यक समुदायों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कंप्यूटर, स्मार्ट बोर्ड और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। छात्रों को एनआईओएस के माध्यम से एसएसएलसी परीक्षा देने के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक युवाओं को नए स्टार्टअप शुरू करने के लिए कर्नाटक अल्पसंख्यक विकास निगम के माध्यम से प्रोत्साहित करने की योजना बनाई है। इसके अलावा, वक्फ संपत्तियों की मरम्मत और जीर्णोद्धार तथा मुस्लिम कब्रिस्तानों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि "मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक कॉलोनी विकास कार्यक्रम" के तहत 1,000 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है, जिसे वित्तीय वर्ष 2025-26 में लागू किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, हज यात्रियों और उनके रिश्तेदारों की सुविधा के लिए बेंगलुरु के हज भवन में एक अतिरिक्त भवन के निर्माण की भी घोषणा की गई है। बजट में जैन, बौद्ध और सिख समुदायों के समग्र विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का अनुदान निर्धारित किया गया है, जबकि ईसाई समुदाय के विकास के लिए 250 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। कलबुर्गी जिले के चित्तपुरा तालुका में स्थित प्राचीन बौद्ध केंद्र "सन्नति" के विकास के लिए "सन्नति विकास प्राधिकरण" की स्थापना की जाएगी।
धार्मिक नेताओं के मानदेय में भी वृद्धि की गई है। जैन पुजारियों, सिख समुदाय के मुख्य ग्रंथियों और मस्जिदों के इमामों का मानदेय बढ़ाकर 6,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है, जबकि सहायक ग्रंथियों और मुअज्जिनों का मानदेय 5,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।
राजकोषीय अनुशासन और राज्य की आर्थिक स्थिरता
मुख्यमंत्री ने अपने बजट भाषण में इस बात पर जोर दिया कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास कार्यों को गति दे रही है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार ने राजकोषीय घाटे और कुल बकाया देनदारियों को अनिवार्य सीमाओं के भीतर रखा है, जिससे राज्य की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी रहेगी।
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