टीडीपी ने सरकार बनाने का दावा पेश किया
राज्य में बीजेपी, टीडीपी और जन सेना पार्टी का गठबंधन है। गठबंधन के विधायक दलों की बैठक में चंद्रबाबू नायडू को सदन का नेता चुना गया है जिसका प्रस्ताव जन सेना पार्टी प्रमुख पवन कल्याण ने पेश किया था, जिसे गठबंधन ने सर्वसम्मति से पास किया। बहुमत होने के कारण चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया है, वे बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ भी लेने वाले हैं। विधायक दलों की बैठक में नायडू ने कहा, 'अमरावती हमारी राजधानी होगी। हम रचनात्मक राजनीति करेंगे, प्रतिशोध की राजनीति नहीं करेंगे। विशाखापत्तनम राज्य की वाणिज्यिक राजधानी होगी। हम लोगों से तीन राजधानियाँ बनाने की बात नहीं करेंगे और न ही इस तरह के कामों में शामिल होंगे।'
तीन राजधानियों की नीति क्या थी
जगनमोहन रेड्डी की सरकार के प्रस्ताव के आधार पर विशाखापत्तनम को कार्यकारी राजधानी, अमरावती को विधायी राजधानी और कुरनूल को न्यायिक राजधानी बनाने की बात कही गयी थी। राज्य में तीन राजधानियों का मामला मार्च 2022 में राज्य के उच्च न्यायालय में गया। जहां कोर्ट ने सिर्फ अमरावती को ही राज्य की राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए कहा। कोर्ट का कहना था कि राज्य के पास इतने संसाधन नहीं है कि राज्य में तीन राजधानियों को तैयार किया जा सके। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ जगनमोहन रेड्डी की सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक जगनमोहन रेड्डी की याचिका पर कोई सुनवाई नहीं की है। कोर्ट याचिका को कई आधारों पर टाल चुका है।
अमरावती का विकास
आरोप है कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार के दौरान अमरावती का विकास रुक गया था। जबकि अमरावती में राजधानी के लिहाज से अभी बहुत काम होना बाकी है। विधायकों के लिए फ्लैट और सचिवालय, विधायी परिसर का निर्माण जैसे कामों का अभी अंतिम चरण बाकी है, जो कई समय से रुका हुआ है। शहर के लिए एक उच्च न्यायालय का भवन तैयार है, जिसको अभी काम में नहीं लाया जा सका है। जगनमोहन रेड्डी की सरकार से पहले नायडू की सरकार ने 2016 में राजधानी शहर के लिए 50,000 करोड़ रुपये का एक मास्टर प्लान तैयार किया था, जिसपर काम होना बाकी है। इस परियोजना के तहत कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर गुंटूर जिले में एक ग्रीनफील्ड शहर विकसित करने की योजना थी।
आंध्र प्रदेश के विभाजन से पहले राज्य की राजधानी हैदराबाद थी। 2014 में आंध्र प्रदेश से तेलंगाना राज्य का निर्माण किया गया। जिसमें आंध्र-प्रदेश की राजधानी रहा हैदराबाद तेलंगाना की तरफ़ चला गया। 2014 के बाद आंध्र प्रदेश की नई राजधानी के रूप में अमरावती को चुना गया। इसलिए अमरावती में अभी भी राजधानी के लिए जरूरी ढांचे को तैयार किया जा रहा है।





