विज ने 23 दिसंबर को अंबाला कैंट में एक सार्वजनिक बैठक में एसएचओ सतीश कुमार को एक महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं करने के कारण फटकार लगाई थी। इस दौरान विज ने एसएचओ से गुस्से में आकर कहा था कि "तू हर चीज में अपनी मर्जी से काम करता है, तू कौन होता है?" विज ने इसके बाद डीजीपी शत्रुजीत कपूर से फोन पर बात कर एसएचओ को तुरंत सस्पेंड करने के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक इस आदेश को लागू नहीं किया गया है और एसएचओ अपनी ड्यूटी पर बने हुए हैं।
इसका परिणाम यह हुआ कि अनिल विज खुद को असंतुष्ट महसूस कर रहे हैं और उनका कहना है कि जब उनके आदेशों का पालन नहीं किया जाता, तो वह ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में शामिल होने का कोई मतलब नहीं समझते। विज ने स्पष्ट किया कि वह अब अंबाला की बजाय पूरे हरियाणा में होने वाली ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग्स में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक उनके आदेशों का पालन नहीं होगा, तब तक इन मीटिंग्स में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी।
विज ने इस पर कड़ा बयान देते हुए यह भी कहा कि यदि उनकी सरकार और प्रशासन उनके आदेशों को लागू नहीं करता है, तो वह किसानों की तरह अनशन पर बैठने के लिए भी तैयार हैं। विज का कहना था कि वह अंबाला की जनता के अधिकारों के लिए हमेशा संघर्ष करते रहेंगे, और अगर जरूरत पड़ी तो वह जनता के अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।
यह घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि यह हरियाणा में प्रशासन और मंत्रियों के बीच बढ़ते असंतोष को उजागर करता है। जहां एक ओर विज को अपने आदेशों के पालन की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की निष्क्रियता ने उनके मन में गहरी निराशा उत्पन्न की है। विज का यह कदम दिखाता है कि उन्होंने न केवल अपने आदेशों के पालन को गंभीरता से लिया है, बल्कि वह इसे लेकर अपनी सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल भी पूछ रहे हैं।
साथ ही, विज के इस बयान ने हरियाणा के राजनीतिक माहौल में हलचल मचाई है। उनके द्वारा अनशन की धमकी दी जाने के बाद, यह स्पष्ट हो गया है कि वह अब इस मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठने वाले।
विज का यह बयान उन कई मुद्दों को लेकर सरकार और प्रशासन की ओर से उठाए गए सवालों को सामने लाता है, जिनका हल अनिल विज अब तक खुद ही तलाश रहे हैं।
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