गंगा स्नान करने के बाद, उन्होंने इस धार्मिक कार्य को लेकर कुछ समय बिताया और अपने समर्थकों के साथ गंगा तट पर भी पहुंचे। बता दें कि इस समय प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन भी चल रहा है, जहां मकर संक्रांति के दिन शाही स्नान का आयोजन हुआ था। इस अवसर पर 13 प्रमुख अखाड़ों के नागा साधुओं ने गंगा में स्नान किया। अखिलेश यादव ने महाकुंभ में भी समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को तैनात किया है, ताकि श्रद्धालुओं की सहायता की जा सके और वहां हर आवश्यक सेवा प्रदान की जा सके। इस दौरान समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा के पास कैंप लगाए हुए हैं, और वहां आने वाले श्रद्धालुओं की मदद कर रहे हैं।
अखिलेश यादव मंगलवार को ही अपने चाचा राजपाल सिंह यादव की अस्थियों के साथ लखनऊ से देहरादून पहुंचे थे। अखिलेश यादव और उनके परिवार के अन्य सदस्य इंडिगो की फ्लाइट से शाम 3:55 बजे देहरादून एयरपोर्ट पहुंचे। इसके बाद, वे हरिद्वार के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने गंगा स्नान किया और रात को एक होटल में विश्राम किया। बुधवार को सुबह 11 बजे अखिलेश यादव अपने चाचा की अस्थियों को विधिपूर्वक गंगा में प्रवाहित करेंगे। यह खास घटना उस स्थान पर होगी, जहां कुछ समय पहले उनके पिता मुलायम सिंह यादव की अस्थियों को भी गंगा में प्रवाहित किया गया था।
राजपाल सिंह यादव का निधन पिछले वर्ष 73 वर्ष की आयु में हुआ था। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका निधन गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में हुआ। उनके निधन के बाद से, अखिलेश यादव और उनका परिवार श्रद्धांजलि अर्पित करने और धार्मिक क्रियाओं को पूरी श्रद्धा के साथ निभाने में जुटे हैं। बुधवार को राजपाल यादव की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करना परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक कार्य है, जो श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।
इस तरह अखिलेश यादव का हरिद्वार में गंगा स्नान और चाचा की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करना न केवल एक धार्मिक कदम है, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है, जिसे विशेषकर उनके समर्थकों और विपक्षी नेताओं द्वारा विभिन्न दृष्टिकोणों से देखा जा रहा है। ऐसे में अखिलेश यादव ने अपनी धार्मिक आस्था और अपने परिवार के प्रति सम्मान का जो उदाहरण पेश किया है, वह राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





