वाइस एडमिरल प्रमोद ने बताया कि पहलगाम में आतंकी हमले के बाद नौसेना के सभी महत्वपूर्ण युद्धपोत, पनडुब्बियां और हवाई इकाइयाँ अरब सागर में तैनात कर दी गई थीं। नौसेना की सक्रिय तैनाती के कारण पाकिस्तान की नौसेना को अपने बंदरगाहों तक ही सीमित रहना पड़ा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि नौसेना ने हथियारों और प्लेटफॉर्म की युद्ध क्षमता की जांच के लिए समुद्र में अभ्यास किए और संभावित लक्ष्यों पर हमले की रणनीति पूरी तरह से तैयार रखी थी। उन्होंने यह भी बताया कि नौसेना हर समय पाकिस्तान की गतिविधियों पर निगरानी बनाए हुए थी।
एयर मार्शल भारती ने बताया कि ऑपरेशन के तहत निर्धारित सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे किए गए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस अभियान में भारत ने आतंकवादियों के ठिकानों को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया, न कि आंकड़ों पर। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तानी विमानों को भारतीय सीमा में घुसने से रोका और कुछ विमानों को निशाना भी बनाया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच 10 मई को दोपहर संवाद हुआ, जिसके बाद संघर्षविराम पर सहमति बनी। हालांकि, पाकिस्तान ने कुछ ही घंटों में इसका उल्लंघन कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर कोई उकसावे की कोशिश हुई, तो भारत की सेना पूरी ताकत से जवाब देगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस अभियान में कई कुख्यात आतंकवादी मारे गए, जिनमें युसूफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद शामिल हैं। ऑपरेशन में कुल नौ आतंकी ठिकानों को सटीक हमलों में ध्वस्त किया गया और 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की पुष्टि हुई।
अधिकारियों ने बताया कि तीनों सेनाओं ने पूरी तरह से समन्वय के साथ काम किया और यही भारत की सैन्य ताकत की सबसे बड़ी विशेषता है। इस प्रेस वार्ता से यह स्पष्ट हो गया कि भारत ने संयम के साथ जवाब दिया, लेकिन अगर फिर कोई उकसावे की कोशिश हुई तो उसका असर और भी गंभीर हो सकता है।
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