अधिकारी के अनुसार, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कई बार इन पुलिसकर्मियों को ड्यूटी से अनुपस्थित पाया गया था या फिर उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों को निभाने से मना कर दिया। अधिकारियों को लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम और निर्धारित होटलों के बीच यात्रा करने वाली टीमों के लिए सुरक्षा प्रदान करने का कार्य सौंपा गया था। हालांकि, ये पुलिसकर्मी या तो अपनी ड्यूटी पर अनुपस्थित रहे या फिर बिना किसी वजह के अपनी जिम्मेदारी को लेने से इंकार कर दिया।
इस मामले के सामने आने के बाद, आईजीपी पंजाब, उस्मान अनवर ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बर्खास्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए जा रहे बड़े टूर्नामेंटों की सुरक्षा के मामले में कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।" उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की अनदेखी या लापरवाही न सिर्फ सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है, बल्कि यह पुलिस विभाग की छवि पर भी सवाल उठाता है।
हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है कि बर्खास्त पुलिसकर्मियों ने अपनी ड्यूटी से इंकार क्यों किया। लेकिन कुछ स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का उल्लेख किया गया है कि बर्खास्त पुलिसकर्मी लंबे समय से लगातार ड्यूटी पर तैनात थे और अत्यधिक शारीरिक और मानसिक बोझ महसूस कर रहे थे, जिसके कारण उन्होंने ड्यूटी से इंकार किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन पुलिसकर्मियों को लगातार कई दिनों तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाना पड़ा, और यही कारण था कि वे ड्यूटी के बोझ से तंग आ गए थे।
यह घटना पंजाब पुलिस के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की सुरक्षा का जिम्मा हमेशा एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। इस प्रकार की घटनाएं पुलिस प्रशासन की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं, और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में तत्काल और कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता होती है।





