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कुलदीप नैयर की किताब 'अनफिनिश्ड इनिंग्स' में नरसिम्हा राव को लेकर बड़ा खुलासा, लिखा- ‘बाबरी विध्वंस से परिचित थे!’

रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि जब अयोध्या में कारसेवक बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर रहे थे, उस समय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव सो रहे थे और इस महत्वपूर्ण घटना से वह अनजान थे। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया है कि नरसिम्हा राव पूजा कर रहे थे

कुलदीप नैयर की किताब 'अनफिनिश्ड इनिंग्स' में नरसिम्हा राव को लेकर बड़ा खुलासा, लिखा- ‘बाबरी विध्वंस से परिचित थे!’
फोटो: कुलदीप नैयर की किताब 'अनफिनिश्ड इनिंग्स' में नरसिम्हा राव को लेकर बड़ा खुलासा, लिखा- ‘बाबरी विध्वंस से परिचित थे!’
पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और बाबरी मस्जिद विध्वंस से जुड़े कई किस्से और अटकलें समय-समय पर सामने आती रही हैं। कुछ रिपोर्टों में यह दावा किया गया है कि जब अयोध्या में कारसेवक बाबरी मस्जिद का विध्वंस कर रहे थे, उस समय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव सो रहे थे और इस महत्वपूर्ण घटना से वह अनजान थे। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया है कि नरसिम्हा राव पूजा कर रहे थे और उन्होंने अपने अधिकारियों को इस दौरान उन्हें परेशान न करने की सलाह दी थी। 

वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी किताब 'बियॉन्ड द लाइन्स' में नरसिम्हा राव के सोने का दावा किया था, लेकिन इस दावे को उस समय नरसिम्हा राव के OSD (विशेष कर्तव्य अधिकारी) रहे पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल ने खारिज किया है। किशोर कुणाल, जो उस समय गृह मंत्रालय में विशेष कर्तव्य अधिकारी के रूप में कार्यरत थे, ने स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति कुछ और थी। उन्होंने कहा कि उस समय नरसिम्हा राव न तो पूजा कर रहे थे और न ही सो रहे थे, बल्कि वह पूरी तरह से जाग रहे थे और लगातार गृह सचिव माधव गोदबोले से मस्जिद के विध्वंस की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। गोदबोले ने दोपहर 12:30 बजे के बाद हर आधे घंटे में नरसिम्हा राव को घटनाक्रम से अवगत कराया। 

किशोर कुणाल ने यह भी बताया कि गोदबोले ने इन सूचनाओं को केवल राव तक नहीं पहुंचाया, बल्कि इन सभी सूचनाओं को गृह मंत्रालय के लॉगबुक में भी दर्ज किया था, ताकि घटनाओं का सही रिकॉर्ड रखा जा सके। यह तथ्य माधव गोदबोले ने अपनी किताब 'अनफिनिश्ड इनिंग्स' में भी उल्लेखित किया है, जो इस बात को प्रमाणित करता है कि नरसिम्हा राव पूरी तरह से सूचित थे और उन्होंने कोई अनजान नहीं किया था। किशोर कुणाल ने यह भी कहा, "यह जानकारी गोदबोले से सत्यापित की जा सकती है, क्योंकि वह अब भी जीवित हैं और इस बारे में सटीक जानकारी दे सकते हैं।" 

उन्होंने यह सुझाव दिया कि पत्रकारों को निष्कर्षों पर पहुंचने से पहले संबंधित व्यक्तियों के बयान और दस्तावेज़ों पर आधारित जानकारी एकत्र करनी चाहिए, बजाय इसके कि किसी अटकलबाजी या बिना किसी ठोस प्रमाण के अपने विचार प्रस्तुत किए जाएं। वह यह भी मानते थे कि आजकल सूचना अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत इस प्रकार की जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती है, जिससे सही तथ्यों को सामने लाना आसान है। कुल मिलाकर, यह मामला न केवल बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय के घटनाक्रम को लेकर उठे सवालों का था, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी ऐतिहासिक घटना के बारे में सही जानकारी पाने के लिए दस्तावेजों और प्रमाणों पर आधारित सत्यापन की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।