ममता बनर्जी बनाम भाजपा
ओपिनियन पोल के आंकड़ों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) को इस बार 155 से 170 सीटों तक मिलने का अनुमान है। यह 2021 में मिली 215 सीटों की तुलना में कम है, लेकिन 148 सीटों के बहुमत आंकड़े को पार कर रही है। सर्वे यह भी दिखाते हैं कि टीएमसी के पास कोई और ऐसा चेहरा नहीं है जो ममता बनर्जी जितना प्रभावी वोट बटोर सके। और ममता बनर्जी बनाम भाजपा की सीधी टक्कर में ममता बनर्जी की व्यक्तिगत लोकप्रियता, खासकर महिलाओं के बीच, अभी भी टीएमसी के लिए बड़ा फायदा साबित हो रही है। ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी महिला-केंद्रित योजनाओं के कारण।
बीजेपी की चुनौती
भाजपा की स्थिति भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। सर्वे के मुताबिक बीजेपी इस बार 110 से 125 सीटें जीत सकती है। पार्टी भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को लेकर एंटी-इंकंबेंसी को भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है। जहां ममता बनर्जी बनाम भाजपा की इस सीधी लड़ाई में पार्टी टीएमसी के खिलाफ गुस्से को ‘परिवर्तन’ के वोट में बदलना चाहती है।
लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन का हाशिए पर होना
वहीं लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन का प्रभाव अभी भी सीमित दिख रहा है। सर्वे अनुसार यह गठबंधन केवल 5 से 10 सीटें जीत सकता है, जिससे उनकी भूमिका निर्णायक नहीं दिखाई देती।
टीएमसी के लिए जोखिम के संकेत
हालांकि ममता बनर्जी की छवि मजबूत है, लेकिन कुछ मुद्दे टीएमसी के लिए चुनौती बन सकते हैं। राशन घोटाला और शिक्षकों की भर्ती में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों ने शहरी और शिक्षित मतदाताओं के बीच टीएमसी की छवि को प्रभावित किया है। इसके अलावा युवा बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था के मुद्दों ने बीजेपी के लिए अवसर पैदा किया है। वोटर लिस्ट विवाद में 60 लाख से अधिक मतदाता प्रभावित हुए हैं, जिससे सरकार के खिलाफ माहौल बना।
अंतिम फैसला: जनता तय करेगी
कुल मिलाकर, ओपिनियन पोल बताते हैं कि ममता बनर्जी का व्यक्तिगत प्रभाव अभी भी मजबूत है, लेकिन TMC की सरकार के कामकाज को लेकर नाराजगी भी है। बीजेपी की चुनावी रणनीति इस नाराजगी को अपने पक्ष में करने पर केंद्रित है। मुकाबला कितना कांटे का होगा, यह 4 मई 2026 के नतीजों के बाद ही साफ होगा।
Read This Also:- अखिलेश यादव WITT शिखर सम्मेलन 2026: बीजेपी पर बोला हमला
Read This Also:- अखिलेश यादव WITT शिखर सम्मेलन 2026: बीजेपी पर बोला हमला





