कांग्रेस अध्यक्ष का भोज और अनुपस्थिति
इंडिया गठबंधन के लोकतंत्र बचाओ मार्च के एक दिन बाद, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गठबंधन के सभी दलों के सांसदों को एक दक्षिण भारतीय रेस्टोरेंट में दोपहर के भोज के लिए आमंत्रित किया। इस भोज का उद्देश्य आगे की रणनीति पर चर्चा करना था, जिसके बाद सांसदों ने जंतर मंतर तक मार्च किया। हालांकि, सपा, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों ने इस भोज में भाग नहीं लिया, जिससे कई तरह के कयास लगाए जाने लगे।
सपा की ओर से स्पष्टीकरण
सपा के एक सांसद ने बताया कि उन्हें पार्टी की ओर से इस भोज की कोई सूचना नहीं दी गई थी, इसलिए वे कांग्रेस अध्यक्ष की मेज पर नहीं पहुंचे, जबकि वे दिल्ली में मौजूद थे। इस घटना के बाद, पार्टी के भीतर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
इसके अलावा, मंगलवार को लोकतंत्र बचाओ मार्च के बाद राहुल और प्रियंका गांधी वाड्रा आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठ गए थे। विभिन्न गठबंधन नेताओं ने शिकायत की थी कि कांग्रेस ने अपनी रणनीति साझा नहीं की और पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इस संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष के भोज में सपा की अनुपस्थिति को लेकर अटकलें लगाई जाने लगीं।
जयराम रमेश का स्पष्टीकरण
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया कि भोज का निर्णय मंगलवार की रात को लिया गया था और उसी समय इसकी सूचना दी गई। इसके बावजूद, भोज में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य कई दलों के लगभग 100 सांसद उपस्थित हुए।
उन्होंने कहा, “भोज के लिए ‘इंडिया’ के सभी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन यह स्वाभाविक था कि कुछ दलों के प्रतिनिधि इसमें शामिल नहीं हो सके। इस पर बेवजह टिप्पणी की जा रही है। इंडिया और अन्य विपक्षी दल वोट चोरी, एसआईआर और परिसीमन के खिलाफ मजबूती से एकजुट हैं।”





