सोनम वांगचुक का खुलासा
लद्दाख के प्रमुख पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों के संदर्भ में यूट्यूबर प्रखर गुप्ता के पॉडकास्ट में एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। वांगचुक ने बताया कि 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद 'कॉकरोच जनता पार्टी' (Cockroach Janta Party - CJP) के आयोजक बेहद निराश हो गए थे।
उन्होंने मुझसे यह अनुरोध किया कि मैं प्रदर्शन समाप्त करने के लिए एक अपील जारी करूं। इस घटना के बाद CJP का मनोबल काफी टूट गया था।
20 जुलाई की घटना का विवरण
सोनम वांगचुक, जिन्होंने शिक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक के खिलाफ 26 दिनों तक भूख हड़ताल की थी, ने 20 जुलाई की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि उस दिन पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के कारण जंतर-मंतर पर तोड़फोड़ हुई थी और स्टेज को भी नुकसान पहुंचा था।
उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने के कारण पुलिस ने उन्हें अस्पताल भेजा। इस बीच, CJP के मुख्य सदस्यों ने उनसे संपर्क किया और कहा, 'अब कोई उम्मीद नहीं बची है, हम यहां से बाहर निकलना चाहते हैं।'
छात्रों का संघर्ष और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
वांगचुक ने आगे बताया कि विरोध प्रदर्शन के नेताओं का मनोबल भीड़ के अनुसार घटता-बढ़ता रहा, लेकिन छात्रों के जज्बे ने आंदोलन को फिर से जीवित कर दिया। 20 जुलाई की निराशा के बावजूद, अगले दिन बड़ी संख्या में छात्र दोबारा जंतर-मंतर पहुंचे, जिससे आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।
इस निरंतर दबाव के चलते तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
कॉकरोच जनता पार्टी का परिचय
'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का गठन अभिजीत दीपके ने किया था, जो बोस्टन यूनिवर्सिटी के स्नातक हैं। दीपके 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम में जुड़े रहे हैं।
यह समूह सोशल मीडिया पर मीम्स, व्यंग्य, एनिमेशन और मैनिफेस्टो के माध्यम से युवाओं की बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाता रहा है, जो बाद में सड़क पर आंदोलन में बदल गया। 6 जून से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन को 28 जून से सोनम वांगचुक के अनशन में शामिल होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा समर्थन प्राप्त हुआ।





