राजनीतिक घमासान की शुरुआत
पश्चिम बंगाल में नवंबर में प्रस्तावित कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) के निकाय चुनावों की तैयारी के साथ ही राज्य का राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। राज्य विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद, पार्टी के विभिन्न धड़े- ममता बनर्जी की अगुवाई वाली MAITC, रितब्रता बनर्जी की DTC और नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के बीच प्रतिस्पर्धा और जुबानी जंग तेज हो चुकी है।
बीजेपी ने भी साफ कर दिया है कि वह निकाय चुनावों में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और सभी वार्डों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
तृणमूल के भीतर शक्ति संघर्ष
तृणमूल के विभाजित गुटों में राजनीतिक शह-मात का खेल चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले शुरू हो चुका है। कालीघाट में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निवास पर हुई बैठक के बाद, ममता खेमे के नेताओं ने कहा कि उम्मीदवार चयन में केवल वफादार नेताओं को तरजीह दी जाएगी। कांग्रेस के साथ गठबंधन के विषय में पार्टी ने बताया कि इस पर केंद्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा।
कुणाल घोष, जो ममता खेमे के विधायक हैं, ने श्यामाबाजार के एक दीवार पर बने ग्राफिटी का फोटो साझा किया, जिसमें NCPI में शामिल हो चुके सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय के चेहरे पर काली स्याही पोती गई थी। इस ग्राफिटी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की तस्वीरें बिना छुए रखी गई थीं। कुणाल ने कहा कि अन्य 'गद्दारों' के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए।
बीजेपी की चुनावी रणनीति
रीतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में DTC के अध्यक्ष अरूप राय ने स्पष्ट किया कि वे 'असली तृणमूल' हैं और NCPI के बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनावी मैदान में उतरेंगे।
कोलकाता निकाय चुनावों के लिए बीजेपी की चुनाव समिति के प्रमुख सुकांत मजूमदार ने पार्टी की पहली बैठक में बताया कि बीजेपी किसी अन्य दल के साथ हाथ नहीं मिलाएगी। NCPI, जिसमें तृणमूल के 20 बागी सांसद शामिल हैं, ने बीजेपी के साथ गठबंधन करने की इच्छा जताई थी, लेकिन मजूमदार ने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारेगी।
परिसीमन के बाद चुनाव की तैयारी
पश्चिम बंगाल की नगर विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने विधानसभा में जानकारी दी कि नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए वार्डों का परिसीमन किया गया है। कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 कर दी गई है, जबकि हावड़ा नगर निगम में यह संख्या 50 से बढ़ाकर 68 कर दी गई है।
मई में विधानसभा चुनावों में हार के बाद, कोलकाता के मेयर और तृणमूल पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया था। वहीं, हावड़ा में परिसीमन विवाद के कारण 2018 के बाद से चुनाव नहीं हो पाए हैं। वर्तमान में दोनों निकायों की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों के पास है। चुनाव आयोग से अगले कुछ दिनों में अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है।





